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Banda News: नायब हुए गायब, सूची से हटा नाम तो अब पहचान का संकट

Tue, 20 Jan 2026 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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फोटो- 10 बीएलओ को घेर कर बैठे एएसडी वोटर, ले रहे सलाह। संवाद
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बांदा। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत नो मैपिंग की श्रेणी में चिह्नित और जीरो मकान में दर्ज कई नायबों के लिए अपनी पहचान साबित करना चुनौती बन गया है। निर्वाचन आयोग द्वारा मांगे गए चार प्रमाण पत्र एकत्र करने के लिए मतदाता तहसील और नगर पालिका के चक्कर लगा रहे हैं। इस प्रक्रिया में अब तक 1600 से अधिक मतदाताओं ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। जबकि नए मतदाता बनने और नाम व पते में संशोधन के लिए 2200 दावे किए गए हैं।
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जिले की चारों विधानसभाओं - बांदा, बबेरू, नरैनी और तिंदवारी में वर्ष 2025 की मतदाता सूची के आधार पर कुल 13,49,521 वोटर हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर वर्ष 2003 की मतदाता सूची के आधार पर 11,74,109 मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत सत्यापन कराया गया। इस सत्यापन में 1.75 लाख मतदाता अनुपस्थित, स्थानांतरित या मृतक पाए गए। इन मतदाताओं को नो मैपिंग की वजह से एएसडी श्रेणी में डाल दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, लगभग 1800 ऐसे मतदाता हैं जो अपने स्वयं के मकानों में निवास करते हैं लेकिन वोटर लिस्ट में उनका नाम जीरो मकान संख्या में दर्ज है। आयोग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद, ये मतदाता अब बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के पास पहुंच रहे हैं। हालांकि, बीएलओ उनसे अपनी पहचान साबित करने के लिए आयोग द्वारा सुझाए गए चार प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। तहसीलदारों के अनुसार, जिले की चारों विधानसभाओं में इस संबंध में 1600 से अधिक आपत्तियां बीएलओ के पास आई हैं।
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एएसडी वोटरों के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र


सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों, बैंक, डाकघर, एलआईसी के पहचान पत्र व पेंशन दस्तावेज
जन्म प्रमाण पत्र

यूपी बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी शैक्षिक प्रमाण पत्र

निवास प्रमाण पत्र

जाति प्रमाण पत्र

परिवार रजिस्टर

मकान का आवंटन प्रमाण पत्र


केस-1
तुलसीनगर निवासी संजय काकोनिया का कहना है कि एक तो बीएलओ गणना प्रपत्र देने घर नहीं आए। अब नोटिस दी जा रही है। एसआईआर के प्रमाणन में पहचान साबित करने के लिए मांगे गए चार प्रमाण मांगे जा रहे हैं। जिन्हें जुटाने में दिक्कतें हो रही हैं।

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केस-2

खिन्नी नाका के रहने वो मनोज द्विवेदी ने बताया कि वोटर लिस्ट में पूरे परिवार के नाम नहीं है। नोटिस के बाद नाम बढ़वाने के लिए गए तो बीएलओ चार प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। एक-दो प्रमाण तो मिल जाते हैं चार को एकत्र करने में बड़ी मुश्किल हो रही हैं।
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केस-3
नगर पालिका के सभासद अजय का कहना है कि बड़ा आश्चर्य है कि उन्हीं का नाम ही वोटर सूची में नहीं है। चार प्रमाण मांगे जा रहे हैं। आम मतदाता को चार प्रमाण देने में दिक्कत हो रही है। निवास, जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोग परेशान हैं।

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केस-4

ठठराही छोटी बाजार निवासी रामू का कहना है कि उसका वोटर सूची में उनका मकान जीरो मकान संख्या में दर्ज है। जब कि उनका मकान 80 साल पुराना है। अब बीएलओ उनसे पहचान साबित करने के लिए चार प्रमाण मांग रहे हैं।


अंतिम सूची का प्रकाशन और नाम हटने का खतरा

तहसीलदार सदर ने बताया कि एएसडी वोटर 27 फरवरी तक अपनी पहचान से संबंधित प्रमाण और आपत्ति संबंधित बीएलओ को जमा कर सकते हैं। इसके बाद आपत्तियों के निस्तारण की कार्रवाई की जाएगी। छह मार्च को विधानसभावार मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाएगा। जो मतदाता पहचान से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाएंगे, उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।







एएसडी वोटरों को पहचान साबित करने के लिए आयोग ने 12 प्रमाण विकल्प सुझाए हैं, जिनमें से चार प्रस्तुत करने हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किन्हीं कारणों से एक प्रमाण उपलब्ध न हो, तो बीएलओ को यह अधिकार है कि वह जांच कर तीन प्रमाणों के आधार पर भी काम चला सकता है।
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- कुमार धर्मेंद्र, उप जिला निर्वाचन अधिकारी
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