स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से सिर्फ खाताधारक और आम उपभोक्ता ही परेशान नहीं है। केंद्र सरकार के विभाग भी इस बैंक के अधिकारियों की मनमानी के शिकार हो रहे हैं। इसमें डाक तार विभाग मुख्य रूप से शामिल है।
डाक विभाग में आरबीआई के दिशा-निर्देश पर जमा की जा रही पुरानी करेंसी अब एसबीआई के स्थानीय अधिकारियों से लेने से दोटूक इनकार कर दिया है। डाक अधीक्षक ने इसकी शिकायत बैंक के मुख्यालय मुंबई आदि को भेजी है। उन्होंने मुख्य ब्रांच के प्रबंधक के व्यवहार पर भी असंतोष जताया है।
आरबीआई ने जिन विभागों या संस्थानों को 30 दिसंबर तक 1000 और 500 के पुराने नोट लेने के लिए छूट दी है उनमें डाक तार विभाग भी है। बड़ी संख्या में डाक तार विभाग के बचत खातों में पुरानी करेंसी जमा हो रही थी, लेकिन बृहस्पतिवार को स्टेट बैंक ने डाक विभाग से पुरानी करेंसी लेने से इनकार कर दिया। चित्रकूटधाम मंडल के डाक अधीक्षक डीएस द्विवेदी ने बताया कि स्टेट बैंक से उनके विभाग से पुरानी करेंसी नहीं ली जा रही।
न ही नई करेंसी दी जा रही है। अधीक्षक ने बताया कि इस बारे में उनके विभागीय अधिकारियों ने एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक से मिलकर बात की तो उन्होंने भी पुरानी करेंसी देने-लेने से मना कर दिया। डाक अधीक्षक ने बताया कि उन्होंने इस बारे में आरबीआई कानपुर, जनरल मैनेजर (करेंसी), मुंबई और डीएम को पत्र भेजकर अवगत कराया है।
अधीक्षक ने यह भी बताया कि मुख्य शाख के प्रबंधक ने उनसे यह भी कहा कि सीएम से कहो या डीएम से, नई करेंसी नहीं मिलेगी। उधर, स्टेट बैंक क्षेत्रीय प्रबंधक आरके सिंह का कहना है कि डाक विभाग के अधिकारी बैंक में जाएं, वहां उन्हें लिखित जवाब मिल जाएगा।