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Banda News: 99 महीने बाद आया फैसला, मृतका का पति बोला-कलेजे को मिली ठंडक

Fri, 25 Jul 2025 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
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चित्रकूट। गुजरात के बुढार की एक स्टील फैक्ट्री के सुपरवाइजर सत्यानंद सिंह की आज फैसला आते ही आंखें नम हो गई। वीडियो कॉल में बातचीत करते रो पड़े और कहा कि आज उसे काफी सुकून मिला है। अवधेश को फांसी के साथ उसकी पत्नी कुसुमकली को भी मृत्युदंड मिलना चाहिए था। इन निर्दयी दंपती के छोटे बच्चों की हत्या करते हाथ भी नहीं कांपे।
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पत्नी लालमुनि बेवफा निकली लेकिन उसके बच्चों की निर्मम हत्या करने वालों को कानून ने सही सजा दी है। उसके कलेजे को ठंडक मिली है। अब भगवान भी इन्हें नरक में कड़ा दंड देंगे। अपने मासूम बच्चों की फोटो दिखाकर रोने लगा।
बातचीत में सत्यानंद ने बताया कि वह 20 अप्रैल 2017 की शाम को वह भूल नहीं पाया जब उसके ही फैक्ट्री में मैनेजर का काम करने वाला सिकरी राजापुर का अवधेश यादव ने उसके साथ विश्वासघात किया। दोस्ती कर घर में आना जाना हुुआ तो उसने उसकी पत्नी से संबध बना लिए। इसके बाद वह पत्नी को अपनी पत्नी बनाकर कहकर ले गया।
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पत्नी के कहने पर ही चारों बच्चे उसके बहकावे में आकर उसके साथ चले गए। इसका कोई दुख नहीं कि पत्नी बेवफा निकली पर सबसे ज्यादा जो आज भी दुख है कि उसकी तीन मासूम बेटियां गौरी, प्रीति, श्रुति व एक मासूम बेटा मोहित इस हैवानियत का शिकार हो गए। उनके मासूम चेहरे आज भी नजरों में घूमते हैं इसी गम के कारण वह खुद बीमार सा रहने लगा है। हर पल बच्चों की याद आती है।
बताया कि वह पत्नी व बच्चों की तलाश कर रहा था। इस घटना की जानकारी उसे पांच मई को जब हुई तो तबसे आज तक वह चैन की नींद नहीं सो सका। अब 99 महीने बाद सुकून की घड़ी आई है जब उसके मासूम बच्चों के हत्यारों को कानून ने कड़ी सजा दी। इससे कलेेजे को ठंडक मिली है। इस फैसले का वह भी काफी दिनों से इंंतजार कर रहा था।
इस केस के बाद से वह दो बार चित्रकूट कचहरी से लेकर सिकरी गांव तक गया था। दूर से ही हत्यारे दंपती अवधेश व उसकी पत्नी कुसुम को देखा तो ऐसी नफरत हुई थी कि दौड़कर जाऊं और दोनों को जान से मार दूं लेकिन अपनी जान का खतरा व कानून के डर से ऐसा नहीं कर सका।
-इनसेट
पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया इस मामले में जब शासकीय अधिवक्ताओं के माध्यम से जानकारी मिली तो गुजराज से सत्यानंद को पुलिस सुरक्षा दिलाने का भरोसा दिया गया। यहां से पुलिस व शासकीय अधिवक्ता के साथ एक टीम गुजरात गई, फिर वहां से उसे लाकर अदालत में पेश किया गया। उसके कई साल से न आने के कारण ही फैसले में भी विलंब हो रहा था। उसके बयान के बाद इस केस में आरोपियों के खिलाफ ज्यादा पुख्ता सबूत मिले। इसी आधार पर फैसला हो सका। सत्यानंद ने यह भी बताया कि आरोपी अवधेश के कुछ रिश्तेदारों ने उसे यहां आने पर जान से मारने की धमकी दी थी। इससे वह भयभीत रहता था।
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