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यथार्थ का कड़ुवा सच है वर्तमान कविता

Sun, 19 Jun 2016 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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साहित्य सम्मेलन में बोलते नासिर अहमद सिकंदर। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। दो दिवसीय लोक विमर्श शिविर में संदीप मील की कहानी ‘कोकिला शास्त्र’ ने सभी का मन छुआ। इसके जरिये पर्यावरण और नारीवाद का संदेश दिया गया। दूसरे सत्र की परिचर्चा में आज की कविता को यथार्थ का कड़ुवा सच बताया।
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पीली कोठी स्थित एक होटल में रविवार को दो दिवसीय लोक विमर्श शिविर के अंतिम दिन साहित्यकार संदीप मील ने अपनी कहानी प्रस्तुत की तो साहित्यकारों के बीच परिचर्चा शुरू हो गई। युवा आलोचक अजीत प्रियदर्शी ने कहा कि संदीप समय के सिपाही हैं। उन्होंने सामयिक मुद्दे पर पर्यावरण और नारीवाद को समाहित कर कहानी को आम आदमी से जोड़ा है। सिद्धेश्वर सिंह ने संदीप को युवा और भविष्य का महान कथाकार बताया। युवा आलोचक शशिभूषण ने संदीप को जड़ समाज का कथाकार बताया। कवि बुद्धिविलास (जबलपुर) ने पहले सत्र का संचालन किया।

दूसरे सत्र में कविता पाठ करते हुए नासिर अहमद सिकंदर ने समकालीन मुद्दों पर काव्य पाठ किया। प्रत्यूष मिंश्र (बिहार) और नरेंद्र कुमार ने बीहड़ व भूख पर आधारित काव्य पाठ किया। प्रद्युम्न कुमार की कविता ‘चार चांद’ को सभी ने सराहा। असंग घोष ने ‘बासुले पर धार’ पर कविता पढ़ी। परिचर्चा में राजकिशोर राजन ने कहा कि आज की कविताओं में कविता को बचाने का सवाल खड़ा हो गया है। नासिर अहमद ने कहा कि आज की कविता यथार्थ का सबसे बड़ा कड़ुवा सच है। नरेंद्र पुंडरीक, बाबूलाल गुप्ता, चित्रकार कुंवर रवींद्र, शशिभूषण मिश्र, जवाहरलाल जलज, अरविंद श्रीवास्तव, प्रेमनंदन, मदन सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता बाबूलाल गुप्ता व संचालन दीनदयाल सोनी ने किया। संयोजक उमाशंकर परमार ने सभी का आभार जताया।
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