जिला पंचायत का टेंडर विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। जिला पंचायत सदस्य भानु प्रताप ने इस संबंध में रिट दायर की थी। हाईकोर्ट ने दो माह के भीतर प्रदेश के प्रमुख सचिव (पंचायती राज) को मामले के निस्तारण के आदेश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि अविश्वास प्रस्ताव के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद से सपा के सफाए और बसपा के कब्जे के बाद इन दोनों दलों में बंटे जिला पंचायत सदस्यों के बीच छिड़ी जंग थमने का नाम नहीं ले रही। जिला पंचायत अध्यक्ष ने हाल ही में छह करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाले कामों के टेंडर जारी किए गए थे।
इस मामले पर विरोध गुट हाईकोर्ट पहुंच गया है। करीब पांच महीने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पद से सपा के महेंद्र सिंह वर्मा को हटाकर बसपा के बल्देव वर्मा की ताजपोशी हो गई थी। इसी के साथ जिला पंचायत के सदस्य दो गुटों में बंट गए। बल्देव वर्मा 13 वोट पाकर अध्यक्ष चुने गए।
पिछले माह जिला पंचायत अध्यक्ष ने राज्य वित्त आयोग से 483 लाख और जिला निधि से 203 लाख रुपये के कार्यों के टेंडर जारी किए। इस पर सपा नेताओं ने मंडलायुक्त से शिकायत करके इस पर रोक लगवा दी। बाद में अध्यक्ष ने कुछ कामों को हटवाकर पुन: टेंडर आमंत्रित कर लिए।
इस पर विरोधी गुट के सपाई सदस्यों ने अबकी इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है। जिला पंचायत सदस्य भानुप्रताप सिंह कछवाह ने टेंडर में शामिल किए गए कामों में तमाम अनियमितताएं, शासनादेश के उल्लंघन आदि के आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति शमशेर बहादुर सिंह की दो सदस्यीय बेंच ने 27 फरवरी को जारी आदेश में कहा है कि उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत (प्रमुख, उप प्रमुख, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष) जांच नियमावली 1997 का हवाला देकर प्रदेश के प्रमुख सचिव पंचायतीराज से अपेक्षा की है कि वह बिना किसी विलंब के यदि संभव हो तो दो माह के भीतर इस शिकायती मामले का निस्तारण कर दें।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि नियमावली के अनुरूप पूरे विवरण के साथ प्रत्यावेदन दाखिल करें।
जांच के बाद गठित हो सकती है संचालन समिति
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा चुकी बसपा को सत्ता पक्ष के विरोध का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि शासन इस पर जांच कराने के साथ ही गुंजाइश पाए जाने पर संचालन समिति गठित कर सकता है।
फिलहाल शासन हाईकोर्ट के आदेशों पर पालन करते हुए टेंडर मामले की जांच कराएगा। जांच में कोई कमी पाई गई तो कार्रवाई भी तय मानी जा रही है। उसी कार्रवाई में संचालन समिति का गठन भी संभव है।