बांदा। सामाजिक एकता से ही देश मजबूत बनेगा। कानून और जागरूकता के जरिये सांप्रदायिकता की सियासत पर नकेल लगाई जा सकती है।
जाति और धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों के खिलाफ ठोस रणनीति बनानी होगी। इसके लिए आवाम में एकजुटता जरूरी है।
यह
बात सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर कार्यालय के राष्ट्रीय सलाहकार डा. सज्जाद हसन
ने कही। वे विद्याधाम समिति व मिसाल (नई दिल्ली) के संयुक्त तत्वाधान में
अतर्रा में आयोजित सामाजिक एकता सद्भावना संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर
रहे थे।
गोष्ठी में कई राज्यों से जुड़े प्रतिभागियों ने बाबरी से
दादरी तक के मुद्दों पर चर्चा की। आरटीआई एक्टिविस्ट सलीम बेग (मुरादाबाद)
ने कहा कि सियासत में नफरत भरी बयानबाजी करने की परंपरा बनती जा रही है।
इससे
देश में असुरक्षा का माहौल बन रहा है। विद्याधाम समिति मंत्री राजाभइया ने
कहा कि जाति और धर्म की राजनीति में बुनियादी जरूरतें और मुद्दे दब जाते
है। जाति और धर्म का भेदभाव फैलाकर समाज में जहर घोला जा रहा है।
सहरोज
फातिमा ने सभी से सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एकजुटता से लड़ने का
आह्वान किया। रमेश त्रिपाठी ने कहा कि स्कूल और पाठ्यक्रम में एकता कायम
करने वाले कर्मवीरों के बारे में नई पीढ़ी को पढ़ाया जाए।
आमिर
(बिहार), अकरम (मुजफ्फर नगर), शफाक (दिल्ली) शाह आलम (अयोध्या) आदि ने
विचार व्यक्त किए। सुरेश कुमार, सीमा, विमला, शिवकुमार गर्ग रवींद्र कुमार,
शबा, माया सोनी, मेराज, सतेंद्र सिंह, संगीता उपस्थित रहे।