बांदा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने इस साल राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज को चौथे साल की एमबीबीएस कक्षाओं की मान्यता तय मानक पूरे न करने पर नहीं दी थी। अब आगामी सत्रों में ऐसी नौबत न आने पाए, इसके लिए मेडिकल कालेज प्रशासन एमसीआई से मान्यता के लिए अभी से जोर आजमाइश करने लगा है। कालेज प्रशासन ने पांचवें शिक्षा सत्र के लिए मान्यता प्राप्त करने की कवायदें शुरू कर दी हैं।
उम्मीद जताई जा रही कि इसी माह एमसीआई की टीम यहां आकर मेडिकल कालेज का फिर से निरीक्षण कर सकती है। गौरतलब हो कि मेडिकल कालेज में वर्ष 2016 से एमबीबीएस कक्षाएं चल रही हैं। हर वर्ष एमसीआई इनकी मान्यता देता है। एमसीआई टीम पूर्व में कई बार यहां निरीक्षण कर चुकी है। उसे यहां काफी कमियां मिली थीं। मेडिकल कालेज प्रशासन को यह कमियां शीघ्र दूर करने का निर्देश दिया था, पर जो भी वजह रही हो मेडिकल कालेज में एमसीआई द्वारा निर्देशित मानकों को पूरा नहीं किया जा सका। इस वर्ष चौथे सत्र की एमसीआई ने मान्यता नहीं दी है। इससे कालेज के भविष्य को लेकर सवाल खड़ा हो गया है।
अरबों की शानदार बिल्डिंग में चल रहे मेडिकल कालेज के भविष्य पर भी आंच आ रही है। मेडिकल कालेज में जो कमियां हैं, उनमें फैकल्टी और 470 बेड के अस्पताल में मरीजों की कम संख्या, आचार्य, सह आचार्य और रेजीडेंट के मुख्य खाली पद हैं। एमसीआई ने मेडिकल कालेज में मरीजों की कम संख्या, आचार्य, सह आचार्य और रेजीडेंट समेत कुल 6 कमियां बताई हैं। कालेज की क्षमता 100 सीट की है। उधर, अभी भी सभी कमियां पूरी नहीं हो सकी हैं। इनमें अधिकांश कमियों को शासन से स्तर से पूरा किया जाना है। उधर, मेडिकल कालेज प्रशासन ने फिर मान्यता हासिल करने के लिए एमसीआई का दरवाजा खटखटाया है।
फाइनल डिग्री में आ सकती है अड़चन
प्रधानाचार्य डॉक्टर मुकेश यादव ने बताया कि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया से मान्यता नहीं मिलने से मेडिकल कालेज में पढ़ने वाले एमबीबीएस छात्रों को फाइनल डिग्री मिलने के बाद रजिस्ट्रेशन में अड़चन आएगी। बताया कि एमबीबीएस कोर्स साढ़े चार वर्ष का होता है। मौजूदा सत्र के अभी डेढ़ वर्ष बाकी हैं।
ये पद हैं खाली
मेडिसिन विभाग : सहायक आचार्य-एक, सीनियर और जूनियर रेजीडेंट दो-दो, बाल रोग विभाग : आचार्य, सीनियर रेजीडेंट, टीबी चेस्ट व स्किन विभाग : सहायक आचार्य, सीनियर रेजीडेंट एक-एक पद। मानसिक रोग विभाग : सहायक आचार्य व सीनियर रेजीडेंट के एक-एक पद, सर्जरी विभाग में सहायक आचार्य-एक और सीनियर रेजीडेंट-तीन पद, आर्थोपेडिक्स में आचार्य और सहायक आचार्य के एक-एक पद, एनेस्थीसिया में सहायक आचार्य और जूनियर रेजीडेंट के दो-दो और सीनियर रेजीडेंट का एक पद, नेत्र विभाग/कम्युनिटी में सहायक आचार्य और रेडियोलॉजी में आचार्य व सहायक आचार्य के एक-एक पद तथा सीनियर रेजीडेंट के दो पद रिक्त हैं। पैथोलॉजी/माइक्रो बॉयलाजी में भी आचार्य व सहायक आचार्य और ब्लड बैंक में आचार्य का एक पद खाली हैं।
मेडिकल कालेज के उपकरण बने शोपीस
मेडिकल कालेज में रेडियोलॉजी विभाग में स्वीकृत सभी पांच पद खाली होने से सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड सेवाएं ठप हैं। शुरुआती समय में यहां रेडियोलॉजी में एक कर्मचारी संविदा पर रखा गया था, पर वह भी कुछ दिनों बाद छोड़कर चला गया। तब से कोई नियुक्ति नहीं हुई। बेशकीमती अल्ट्रासाउंड मशीनें शोपीस बनी हैं।
आईपीडी में मानक से कम भर्ती हो रहे मरीज
मेडिकल कालेज में 470 बेड का अस्पताल संचालित है। वाह्य रोग विभाग (ओपीडी) में मरीजों का रोजाना औसत लगभग 1600 बताया गया है। एमसीआई मानक में तो ये फिट है, लेकिन इमर्जेंसी विभाग (आईपीडी) की प्रगति बेहद कमजोर है। यहां रोजाना 120 से 130 मरीजों के भर्ती होने का औसत है, जबकि एमसीआई मानक यहां 300 मरीज रोजाना भर्ती होने चाहिए। यहां चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों के अलावा सीमावर्ती मध्य प्रदेश के पन्ना, अजयगढ़, छतरपुर आदि के मरीज भी इलाज को आ रहे हैं।
हृदय रोग विभाग में डाक्टर नहीं
मेडिकल कालेज के चीफ सुपरिटेंडेंट (मुख्य अधीक्षक) डा. सुनील कुमार आर्या ने बताया कि मौजूदा समय में ईएनटी (नाक, कान, गला), नेत्र रोग, सर्जरी, बाल रोग, मेडिसिन और स्त्रत्त्ी एवं प्रसूति रोग आदि से संबंधित मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हृदय रोग विभाग में डाक्टर की कमी है। पूर्व में इस विभाग में संविदा पर डा. जीके अग्रवाल तैनात थे। अन्य रोग विशेषज्ञों की तैनाती के लिए कोशिशें जारी हैं।
मानक बदलने से कमियां भी बढ़ीं
वर्ष 2016 और 17 में मेडिकल कालेज को एमसीआई द्वारा आसानी से मान्यता मिल गई थी। एमबीबीएस कक्षाएं शुरू होने के बाद मानकों में बदलाव के साथ कालेज में कमियां बढ़ती गईं। वर्ष 2018 में डाक्टरों की कमी से मान्यता अटक गई थी। संविदा पर डाक्टरों को नियुक्त करने के बाद मान्यता हासिल हुई थी।
‘पांचवें सत्र के लिए मान्यता हासिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कमियां दूर करने को चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को पत्र भेजा गया है। इसी माह अंतिम सप्ताह में एमसीआई टीम के आने की उम्मीद है।’
डॉक्टर मुकेश यादव, प्रधानाचार्य, राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज बांदा।