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विदेशी मेहमान भी जूझे नोट बंदी से

Wed, 16 Nov 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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भ्रमण पर कालिंजर दुर्ग आए दक्षिण कोरिया के पर्यटक। - फोटो : amarujala
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बड़े नोटों की बंदी से दक्षिण कोरिया के पर्यटकों के दल को भी तमाम दिक्कतों से जूझना पड़ गया। बैंकों की लाइन में तो धक्के खाए ही, भारत की पसंदीदा चीजें भी नहीं खरीद सके। उनका कहना था कि काले धन पर अंकुश के लिए सिर्फ करेंसी वापस लेना काफी नहीं है। इसके लिए कानून बने तभी बात बनेगी।
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सोमवार को दक्षिण कोरिया के पर्यटकों का दल यहां कालिंजर दुर्ग देखने आया था। दल में 11 सदस्य हैं। दल के मुखिया यांग बियांग सिमोक ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि 500 और 1000 के नोट बंद होने की जानकारी उन्हें भारत आने पर मिली। वह उसी रात (8 नवंबर) को दिल्ली पहुंचे।

अगले दिन अपने गाइड के साथ दिल्ली में बैंक जाकर डालर के बदले भारतीय करेंसी बदलनी चाही तो बमुश्किल 25 हजार रुपये मिले। यह उनकी जरूरत से बहुत कम थे। अगले दिन पुष्कर (राजस्थान) गए। वहां आईओबी की लाइन में दो घंटे तक खड़े रहे। नंबर आने से पहले बैंक की करेंसी खत्म हो गई। बैरंग लौटना पड़ा। भारत की तमाम पसंदीदा चीजों की शापिंग (खरीददारी) नहीं कर सके।
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यांग बियांग सिमोक ने कहा कि ब्लैक मनी (काला धन) का खात्मा करने के लिए सिर्फ बड़े नोटों पर पाबंदी काफी नहीं है। इसके लिए कानून बनना चाहिए। अपने देश दक्षिण कोरिया का हवाला देकर कहा कि उनके पहले प्रधानमंत्री पार्क चंग व्ही ने 40 साल पहले ब्लैक मनी को कंट्रोल करने के लिए कानून बना दिया था। इसलिए वहां भ्रष्टाचार और काले धन की समस्या नहीं है। बताया कि कोरिया की मुद्रा वॉन है। एक वॉन में 20 भारतीय रुपये मिलते हैं। इसलिए भारत में घूमना काफी महंगा पड़ता है। कोरियाई दल यहां से बनारस के लिए कूच कर गया।

दक्षिण कोरिया पर्यटक दल के मुखिया यांग बियांग सिमोक ने बताया कि वह 11वीं बार भारत आए हैं। भारत के पुराने महल, पहाड़, नदियां आदि उन्हें बहुत पसंद हैं। उन्होंने बताया कि दक्षिण कोरिया में हरेक युवक को तीन साल के लिए आर्मी (फौज) ज्वाइन करना जरूरी है। ऐसा न करने पर उसकी शादी नहीं हो सकती। साथ ही तमाम सरकारी योजनाओं से वंचित कर दिया जाता है। पड़ोसी उत्तरी कोरिया से चल रहे विवाद की वजह से उनका देश अमेरिका की मदद लेता है। सिमोक ने अपने देश के तानाशाह शासक किम जोंग को सिरफिरा (पागल) बताया।
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