बांदा। कौमी एकता का प्रतीक ‘जश्ने वारिस पाक’ शुरू हो गया। यह दो दिन चलेगा। इसे अध्यात्म प्रेम एवं कौमी एकता उत्सव भी कहते हैं। शुरुआत कुरानख्वानी और दोपहर को चादर जुलूस रवानगी से हुई। देर शाम मजार मेें नात और तकरीर हुईं। यह आयोजन कौमी एकता वारसी एकेडमी द्वारा किया जाता है।
नरैनी रोड पर स्थित मिस्कीन शाह का सालाना उर्स हर वर्ष मनाया जाता है। बुधवार को सुबह कुरानख्वानी के बाद दोपहर को रायफल क्लब ग्राउंड से गागर और चादर जुलूस मजार के लिए रवाना हुआ। इसमें पीले वस्त्रधारी बाबा मिस्कीन शाह के हिंदू-मुस्लिम अनुयायी और श्रद्धालु शामिल थे।
हजरत शोहराब शाह वारसी (खंडेहा), शयम शाह वारसी (कानपुर) व जमाल शाह वारसी (रामनगर) भी चादरपोशी में शामिल रहे। चादर जुलूस में कव्वाल पार्टियां कलाम पेश करती रहीं। रात को नातख्वानी हुई। मौलाना हजरत हसनैन वारसी (देवा शरीफ, बाराबंकी) ने हजरत वारिस की शान में बयान किया।
शेर भी सुनाया। इस अवसर पर अध्यक्ष अनीस वारसी, महामंत्री नफीस अली, नजरे आलम, गिरधर जेठानी, रामगोपाल साहू, राकेश मिश्रा, मानिकचंद्र, हबीब वारसी, फखरू, राशिद, मझले, अनस, रफीक, इदरीस वारसी समेत संस्था के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।
गुरुवार (7 अप्रैल) को दोपहर 3 बजे से रात 8 बजे तक शुद्ध शाकाहारी लंगर होगा। रात 9 बजे रायफल क्लब ग्राउंड में फैय्याज खां आतिशबाज आतिशबाजी का प्रदर्शन करेंगे। रात 8 से 11 कव्वालियां होंगी। तड़के 4:13 पर कुल शरीफ और तबर्रुख वितरण होगा।