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10 फीसदी से ज्यादा न हो बच्चों के बस्ते का बोझ, निर्देश जारी

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बांदा। पहली से 12वीं कक्षा तक के बच्चों की पीठ से बस्ते के बोझ में कमी की कवायद शुरू हो गई है। भारत सरकार की स्कूल बैग पॉलिसी के तहत बैग का वजन बच्चों के वजन से 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। केंद्र की इस नीति के तरफ मंडलायुक्त का ध्यान दिलाए जाने के बाद आयुक्त ने डीएम व डीआईओएस को निर्देश जारी किए हैं।
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भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष और जिला अधिवक्ता संघ पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने मंडलायुक्त को इस बारे में पत्र देकर केंद्र सरकार की स्कूल बैग पॉलिसी का अनुपालन कराने का अनुरोध किया था। इस पर मंडलायुक्त दिनेश कुमार सिंह ने डीएम को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उधर, डीएम के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने जनपद के सभी शासकीय, अशासकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन, मान्यता प्राप्त, सीबीएसई हाईस्कूल व इंटर कालेजों के प्रधानाचार्यों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि पहली से 10वीं तक के बच्चों के बैग का वजन उनके शरीर के वजन से 10 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। यह भी निर्देश दिया है कि निजी शिक्षण संस्थानों में एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाएं।
ऐसी है सरकार की पॉलिसी
केंद्र सरकार के स्कूल बैग पालिसी के अनुसार कक्षा एक से 12 तक के छात्र-छात्राओं का स्कूल बैग उनके शरीर के वजन के 10 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा गाइडलाइन है कि प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल बैग से मुक्त रखा गया है। केंद्र सरकार ने सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय संगठनों में यह व्यवस्था लागू कर रखी है। इसके बावजूद बच्चों की पीठ पर भारी-भरकम बस्ते देखे जा रहे हैं।
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स्कूल बैग पालिसी में पहली से 12वीं तक बच्चों और बैग का वजन (किलोग्राम में)-
कक्षा बच्चे के वजन बस्ते का वजन
प्री-प्राइमरी 10-16 कोई बस्ता नहीं
कक्षा एक 16-22 1.6-2.2
कक्षा 3 17-25 1.7-2.5
कक्षा 4 17-25 1.7-2.5
कक्षा 5 17-25 1.7-2.5
कक्षा 6 20-30 2-3
कक्षा 7 20-30 2-3
कक्षा 8 25-40 2.5-4
कक्षा 9 25-45 2.5-4.5
कक्षा 10 25-45 2.5-4.5
कक्षा 11 35-50 3.5-5
कक्षा 12 35-50 3.5-5
प्री से सीनियर सेकेंडरी तक के बच्चों को लॉकर मिले
स्कूल बैग पालिसी में कहा गया है कि प्री स्कूल से सीनियर सेकेंडरी स्कूल तक के छात्र-छात्राओं को स्कूल में लॉकर उपलब्ध कराना चाहिए। हर तीन महीने में छात्रों के स्कूल बैग के वजन की जांच शिक्षकों को करनी चाहिए और बच्चों के माता-पिता को भारी बैग की जानकारी देनी चाहिए। कहा गया है कि भारी बस्ते से बच्चों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सिर दर्द, कंधे में दर्द, पीठ के निचले हिस्से में दर्द, हाथ में दर्द आदि हो सकते हैं।
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