हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस सभाजीत यादव व अधिवक्ता आदि।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सभाजीत यादव ने कहा है कि देश की आजादी आसमान से गिरकर खजूर पर अटक गई है। यह आम आदमी तक नहीं पहुंच पाई। देश में 16 लोकसभा और 17 विधानसभा चुनाव के बाद भी आर्थिक और सामाजिक विषमता की खाईं नहीं पटी। 73 फीसदी चल एवं अचल संपत्ति पर मात्र एक फीसदी लोगों का कब्जा है। पूर्व न्यायाधीश ने ये बातें रविवार को आयोजित सामाजिक न्याय सम्मेलन बुंदेलखंड को संबोधित करते हुए कहीं। सम्मेलन का आयोजन अधिवक्ता द्वारिकेश सिंह यादव मंडेला ने किया।
वर्ष 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 20 करोड़ आबादी में 50 फीसदी लोग भूमिहीन हैं। वर्ष 2008 से अब तक सरकारी बैंकों से देश के औद्योगिक घरानों द्वारा लिया गया 10 लाख करोड़ से अधिक कर्ज डकारा जा चुका है। सरकार ने एनपीए घोषित करके इस कर्ज को माफ कर दिया। दूसरी तरफ लाख या 50 हजार रुपये के कर्जदार किसानों की जमीन नीलाम हो जाती है। उन्होंने कहा कि भाजपा का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ थोथा साबित हुआ है। प्रदेश में 8 लाख पढ़े-लिखे नौजवान बेरोजगार घूम रहे हैं। एक खबर का हवाला देकर पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान सभा में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सदस्यों की संख्या बढ़ी है।
एचएल इंटर कालेज में आयोजित सामाजिक न्याय सम्मेलन को इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रेमप्रकाश यादव, अवकाश प्राप्त प्रोफेसर डा. बीडी प्रजापति और सामाजिक न्याय मोर्चा के अध्यक्ष व इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र नेता मनोज यादव ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में 10 प्रस्ताव पारित किए गए। संयोजक द्वारिकेश सिंह यादव मंडेला ने आभार जताया। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डा.अनूप पटेल, बाबूराम यादव, विजय बहादुर यादव, सूर्यबली निषाद, डा. राजबहादुर कुशवाहा, रामतीर्थ वर्मा, जवाहरलाल जलज, अमित यादव, गोरखनाथ यादव, केशव प्रसाद यादव, चंद्रपाल वर्मा, वीरेंद्र कुमार साक्षी, रामरूप सिंह खेंगर, राममिलन सिंह पटेल आदि शामिल रहे। संचालन रमाशंकर यादव ने किया। मेजबान कालेज प्रधानाचार्य रामस्वरूप साहू ने सभी का आभार जताया।