बांदा। फर्जीवाड़े के इस संगठित खेल में अब चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि चकबंदी लेखपाल ही इस पूरे गिरोह की रीढ़ था, जो चंद रुपयों के लालच में सरकारी गोपनीय सूचनाएं गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाता था। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर जमीनों की पहचान कर धोखाधड़ी का पूरा खेल रचा जाता था।
पुलिस अधिकारियों की मानें तो चकबंदी लेखपाल विजय प्रकाश राजस्व अभिलेख, खाली पड़ी जमीनों और कमजोर मालिकों की जानकारी गिरोह तक पहुंचाता था। जैसे ही सूचना मिलती, गिरोह के सदस्य फर्जी गवाह, विक्रेता और दस्तावेज तैयार कर जमीन बेचने का काम करते थे। गिरोह खासतौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाता था जो या तो जमीन के मामलों में अनजान थे या आर्थिक रूप से कमजोर थे। उनकी जमीनों के कागजात जुटाकर फर्जी रजिस्ट्री कर दी जाती थी और बाद में कब्जा भी करा दिया जाता था।
फर्जी दस्तावेज तैयार करने का पूरा नेटवर्क
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह में शामिल अन्य सदस्य फर्जी आधार कार्ड, पहचान पत्र और गवाह तैयार करने में माहिर थे। मोबाइल और प्रिंटिंग की दुकानों के जरिए दस्तावेजों को असली जैसा बनाया जाता था, जिससे आसानी से लोगों को झांसे में लिया जा सके। पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था।
कोतवाली नगर में भी दर्ज हैं तीन मुकदमे
इस पूरे फर्जीवाड़े के तार अब शहर कोतवाली तक भी पहुंच सकते हैं। कोतवाली नगर में बीते कुछ माह में तीन अलग-अलग प्रकरण दर्ज हैं, जिनमें पीड़ित द्वारा जमीन की धोखाधड़ी और फर्जी रजिस्ट्री कराने के आरोप लगाए हैं।