बांदा। बुंदेलखंड में सूखे के नाम पर गरमाई सियासत के
पीछे यहां की 19 विधानसभा सीटें हैं। पिछले विधान सभा चुनाव में यहां सपा
और बसपा ने अपनी जीत के झंडे गाड़े थे।
अगले वर्ष होने वाले
चुनावों के लिए कांग्रेस और भाजपा में होड़ है। केंद्र जहां बुंदेलखंड में
रोड मैप की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस के राहुल गांधी यहां रोड मार्च
करने आ रहे हैं।
कई साल से मौसम और कुदरत की मार झेल रहे
बुंदेलखंड के किसानों को भले ही कुछ हाथ न लगा हो, लेकिन राजनीतिक दलों को
इसकी आड़ में मुद्दा जरूर मिल गया है।
बुंदेलखंड लगातार सुर्खियों
में बना है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बुंदेलखंड में सपा और बसपा ने
बराबरी का प्रदर्शन करते हुए सात-सात सीटें जीतीं।
कांग्रेस के
हाथ चार सीटें लगीं। भाजपा को मात्र एक सीट पर संतोष करना पड़ा। अगले वर्ष
फिर विधानसभा का चुनाव है। इस वर्ष फिर सूखा पड़ा है।
ऐसे में
बुंदेलखंड की एकमुश्त 19 सीटों पर राजनीतिक दलों की नजरे हैं। कांग्रेस
इसलिए यहां ज्यादा जोर दे रही है कि पूरे प्रदेश में मात्र बुंदेलखंड ही
ऐसा क्षेत्र है, जहां उसके एकमुश्त चार विधायक हैं।
उधर, पिछले
लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड में भाजपा के लहराए परचम से भाजपा विधानसभा
चुनाव में भी उम्मीदें लगाए बैठी है। भाजपा की केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड
के लिए रोड मैप बनाना शुरू कर दिया है।
यह जिम्मा केंद्रीय कृषि
मंत्रालय को सौंपा गया है। उधर, इसी माह कांग्र्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी
बुंदेलखंड की खाक छानने आ रहे हैं। वे यहां रोड मार्च करेंगे। कुल मिलाकर
इस चुनावी वर्ष में बुंदेलखंड का सूखा राजनीति का मुद्दा और राजनैतिक दलों
का हथकंडा बना रहेगा।