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बीता पखवारा पर शुरू नहीं हुई जांच सुविधाएं

Wed, 25 Mar 2015 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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मुख्यमंत्री के उद्घाटन के बाद शुरू हुए मेडिकल कालेज में एक पखवारे बाद भी बीमारी से परेशान मरीजों को ‘आराम’ नहीं मिल रहा। वजह, जो डाक्टर हैं, उनके पास जांच आदि के संसाधन नहीं हैं।
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ऐसे में मेडिकल कालेज आम लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा। बगैर मशीनों और अन्य संसाधनों के डाक्टर चंद घंटे बैठ कर ओपीडी चालू रखने की रस्म अदायगी कर रहे हैं।

औसतन यहां रोज 200 मरीज आ रहे हैं। गंभीर बीमार या घायल के लिए मेडिकल कालेज में अभी कोई व्यवस्था नहीं है। संविदा पर रखे गए रिटायर और बांदा के प्राइवेट डाक्टर ओपीडी में दो बजे तक ही मरीजों को बगैर किसी उपकरण से जांच आदि के देख रहे हैं।
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दिन में 2 बजते ही मेडिकल कालेज में ताला पड़ जाता है। एक अदद एक्स-रे मशीन आई है, वह चालू नहीं की गई है। रूम में ताला पड़ा रहता है। उधर, अन्य कोई मशीन भी नहीं है।

मेडिसिन व दंत चिकित्सा विभाग में कुछ मरीजों की चहल-पहल रहती है। नेत्र रोग, जर्नल सर्जरी, बाल रोग, स्त्री एवं प्रसूत विभाग से मरीजों का मोह भंग हो रहा है। बुधवार को इन विभागों में सन्नाटा था।

प्रिंसिपल डा.आरपी सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बजट आते ही सभी व्यवस्थाएं पटरी पर आ जाएंगी। जांच मशीनें और अन्य उपकरण भी जल्द आ जाएंगे। ओपीडी में हर रोज 150-200 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डाक्टरों के लिए मेस भी जल्द चालू होगा।


बाहरी लोग काउंटर पर कर रहे वसूली
मेडिकल कालेज में अभी से अंधेरगर्दी शुरू हो गई। औषधि वितरण व पर्चा काउंटर में गैर विभागीय लोगों का घंटों कब्जा रहता है। बुधवार को यहां बैठे लोग पर्चे का शुल्क किसी से एक रुपया तो किसी से दो या पांच रुपया वसूलते रहे।

पर्चा काट रहे व्यक्ति ने बताया कि उसका सुभाष नाम है। यहां नियुक्ति नहीं है, दोस्त की वजह से बस ऐसे ही बैठ गया था।

बिना मेस डाक्टरों को नाश्ते-खाने के लाले
मेडिकल कॉलेज में डाक्टरों के ठहरने और खाने के भी लाले हैं। इससे उन्हें घर से टिफिन लाना पड़ता है या फिर पांच-सात किलोमीटर दूर शहर भोजन के लिए आना पड़ता है। इस बीच मरीजों को डाक्टरों का इंतजार करना पड़ता है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.कंचन सिंह ने बताया कि अभी सामान्य मरीज ही आ रहे हैं। जांच सुविधाएं बढ़ने के बाद डिलीवरी आदि शुरू होंगी। नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. मकसूद अहमद ने बताया कि दो बजे तक ड्यूटी में रहना पड़ता है। मेस आदि न होने से दिक्कतें हो रही हैं।
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