बांदा। केरोसिन छिड़ककर 20 टन कोयला और मकान जलाने के दोषी को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अर्थदंड अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा होगी। अतर्रा थाना क्षेत्र के पिंडखर गांव निवासी गेंदा सिंह पुत्र बाबू सिंह ने 19 मार्च 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
उन्होंने बताया कि वह पिंडखर गांव में कोयला भट्ठी का संचालन कर रहा था। जिसका लाइसेंस विकास पुत्र शत्रुघ्न सिंह के नाम था। उसी स्थान पर वह खपरैलदार मकान बनाकर रहता था। 14 मार्च 2016 की रात वह घर में सो रहा था। आहट मिलने पर उसने खिड़की से देखा तो गांव के रामजियावन, दिलीप सिंह उर्फ लाला कोयला भट्ठी स्थल पर कोयला के ढेर पर और मकान के खपरैल में तेल छिड़क रहे थे।
बताया कि मकान के दरवाजे की कुंडी लगाने के बाद उन्होंने कोयले के ढेर और खपरैल में आग लगा दी। वह किसी तरह से जान बचाकर भागा। शोर मचाने पर ग्रामीण पहुंचे।
इसी दौरान आरोपी जानमाल की धमकी देते हुए मौके से भाग निकले। इस दौरान मकान और 20 टन कोयला जलकर राख हो गया। अग्निकांड में साढे़ तीन लाख का नुकसान हुआ।
मुकदमे के दौरान 21 अगस्त 2017 को सह अभियुक्त दिलीप सिंह की मृत्यु हो गई। मामला केवल रामजियावन सिंह पर चलाया गया। अदालत ने रामजियावन के विरुद्ध 4 मई 2017 को आरोप बनाया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से चार गवाह पेश किए गए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों व अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने रामजियावन को दोषी पाते हुए सजा और जुर्माना से दंडित किया।