बांदा। शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की आराधना के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महेश्वरी देवी मंदिर से लेकर गिरवां के खत्री पहाड़ स्थित सिद्ध शक्तिपीठ तक भक्तों ने दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। पंडालों में भी देवी के जयकारे गूंजते रहे।
घरों में कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय पूजा-अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। कस्बों और गांवों में देवी प्रतिमाओं की स्थापना कर पंडाल सजाए गए हैं। अतर्रा, तिंदवारी, पैलानी, नरैनी, बिसंडा, बदौसा और कालिंजर समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नवरात्र को लेकर उत्साह दिखाई दिया। शहर में महेश्वरी देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। छावनी रोड चौराहे, अतर्रा चुंगी और बाबूलाल चौराहे स्थित काली माता मंदिर समेत अन्य स्थानों पर स्थापित देवी प्रतिमाओं की पूजा की गई।
पैलानी तहसील क्षेत्र में पाथादाई, गढ़ीदाई, योगिनी माता, पूर्वी माता और काली देवी मंदिर में सुबह से श्रद्धालु पहुंचे। पूजा-अर्चना के साथ कलश स्थापना और जौ बोने की परंपरा निभाई गई। बबेरू कस्बे में भी तीन दर्जन से अधिक देवी पंडाल सजाए जा रहे हैं। मरका क्षेत्र के बाकल स्थित जोगनी माता मंदिर में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
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83 पंडालों में विराजी मां दुर्गा
तिंदवारी। क्षेत्र में 83 देवी पंडाल बनाए गए हैं। इनमें 19 पंडाल कस्बे में हैं। बेंदा घाट स्थित मां काली मंदिर और मुंगुस गांव के मां सिंहवाहिनी मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यमुना तट पर स्थित मां काली मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना होती है। यहां नौ दिनों तक मेला लगता है। श्रद्धालु कन्या भोज, मुंडन, कथा और भंडारे का आयोजन करते हैं।
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खत्री पहाड़ में शुरू हुआ मेला
गिरवां। क्षेत्र के अकबरपुर स्थित श्री सिद्धिदात्री विंध्यवासिनी मंदिर, खत्री पहाड़ में नवरात्र के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां विशेष अनुष्ठान, शतचंडी महायज्ञ, रात्रि जागरण और रामलीला का आयोजन होता है। मंदिर परिसर में मेला भी लगता है।
फोटो- 4-छावनी रोड चौराहे पर भक्तों ने रखी मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा। संवाद
फोटो- 4-छावनी रोड चौराहे पर भक्तों ने रखी मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमा। संवाद