बांदा। उपवास और रमजान का एक अद्भुत संगम लेकर मंगलवार आ रहा है। इस दिन चैत्र नवरात्र और माह-ए-रमजान एक साथ दस्तक दे रहे हैं। शिद्दत की गर्मी में हिंदू-मुस्लिम दोनों ही पूरा दिन भूख-प्यास सहने की तपस्या करेंगे। कोई व्रत रखेगा तो कोई रोजदार होगा। मंदिर-मस्जिद दोनों ही गुलजार होंगे। एक तरफ जहां तड़के मंदिरों से देवी गीत गूंजेंगे तो दूसरी तरफ मस्जिदों से सहरी की सदाएं आएंगी। दोनों ही धर्म-मजहब के अनुयायी तैयार हैं।
हिंदू पंचांग के मुताबिक, मंगलवार (13 अप्रैल) से चैत्र माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि है। इसी दिन से नवरात्र शुरू होंगे। देवी दुर्गा के भक्त मनोकामनाएं लेकर उपवास/व्रत की शुरुआत करेंगे, जो नौ दिन चलेगा। अबकी कई शुभ योग भी बन रहे हैं। पहले दिन विष्कुंभ व प्रीति योग बनने से इसका महत्व और बढ़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे शुभ माना जाता है। आस्थावान महिला-पुरुष पूरे नवरात्र रोजाना व्रत रखेंगे और शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना करेंगी। शहर के महेश्वरी देवी, काली देवी, सिंहवाहिनी, मरही माता, चौसठ जोगिनी सहित विंध्यवासिनी (खत्री पहाड़), बेंदा की कालका देवी आदि मंदिरों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। बड़ी संख्या में तड़के से देर रात तक भक्तों से यह मंदिर गुलजार रहेंगे।
उधर, मुस्लिमों का सबसे पाकीजा माह रमजान भी इसी दिन से शुरू हो रहा है। तड़के से सूर्यास्त तक लगभग साढ़े 14 घंटे मुस्लिम अनुयायी रोजा रखेंगे। घरों में इफ्तार के विशेष व्यंजन पकेंगे। रात में तरावीह की विशेष नमाज होगी। तड़के चार बजे के आसपास सहरी करेंगे। मस्जिदों को विशेष रूप से संवारा गया है। घरों में भी इफ्तार, तिलावत, इबादत आदि की तैयारियां हैं। कोविड-19 गाइडलाइन का अनुपालन होगा। शहर की नवाबी जामा मस्जिद सहित आधा सैकड़ा से ज्यादा मस्जिदें पांचों वक्त की नमाजों में नमाजियों से आबाद रहेंगी। आम दिनों में जो नमाज नहीं अदा करते वह भी नमाजी नजर आएंगे।