स्टोक कांगड़ी चोटी पर खड़ा बांदा का शिक्षक संदीप सिंह।
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ग्रीष्मकालीन अवकाश में प्राथमिक विद्यालय का युवा शिक्षक पर्वतारोही बन गया। शौक-शौक में ही उसने तीन दिन की जोखिम भरी पर्वत यात्रा पूरी कर 6153 मीटर ऊंचाई पर स्थित स्टोक कांगड़ी चोटी फतह कर ली। शून्य से भी 12 डिग्री कम तापमान इस पर्वतारोही के हौसले को नहीं डिगा पाया। शायद बुंदेलखंड का यह पहला पर्वतारोही शिक्षक है।
नरैनी ब्लाक में स्थित मूड़ी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में संदीप सिंह सहायक अध्यापक हैं। वे शहर के अलीगंज (गणेश भवन) में रहते हैं। पिता शिवबली सिंह कांग्रेसी नेता हैं। संदीप को पर्वतों का जोखिमभरा सफर शुरू से ही पसंद रहा है। पहली बार दो वर्ष पूर्व उसने अकेले दम पर हिमालय पर्वत की 5400 मीटर ऊंचाई रूप कुंड चोटी फतह की थी। अबकी ग्रीष्मकालीन अवकाश में उसे फिर यह शौक सवार हुआ और 23 जून को वह यहां से लेह पहुंच गया। रात करीब 11 बजे स्टोक गांव से पर्वतारोही की ड्रेस पहनकर हिमालय पर चढ़ने की शुरुआत कर दी। पहले दिन आठ किलोमीटर की यात्रा आठ घंटे में पूरी की। अगले दिन मनकर्मो चोटी से स्टोक कांगड़ी बेस कैंप तक लगभग दो किलोमीटर पैदल चढ़ाई पूरी की।
संदीप ने बताया कि ग्लेशियर लगभग डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे पैदल पार करने में लगभग 6 घंटे लगे। दिन में बर्फ पिघलने से फिसलन होती है। लिहाजा रोजाना रात में ही सफर किया। ग्लेशियर में रात का तापमान शून्य से 12 डिग्री कम हो जाता है। आक्सीजन की भारी कमी रहती है। हाड़कंपाऊं ठंड में संदीप के नाखून तक गिर गए, लेकिन जज्बा कम नहीं हुआ। अंतत: ग्लेशियर स्टोक कांगड़ी चोटी तक पहुंचने के बाद वापस लौट पड़ा और 26 जून को लेह आ गया।
संदीप ने बताया कि पर्वतारोहियों के ग्रुप में जाने में लगभग 19 हजार रुपये शुल्क लगता है। लिहाजा वह अकेले ही गया। पर्वतारोहण वाले जूते-जैकेट आदि वहीं किराए पर ले लिए थे। इसके पूर्व संदीप मई 2016 में हिमालय की रूप कुंड चोटी फतह कर चुके हैं। शुक्रवार को यहां गंछा रोड स्थित आरएन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज में प्राचार्य अजय पांडेय के नेतृत्व में संदीप का स्वागत किया गया