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सीडीओ गंगाजल की शपथ लेकर कहें कि श्रमदान नहीं हुआ

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नहर की खुदाई करते श्रमिक। - फोटो : BANDA
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बांदा। भंवरपुर (नरैनी) में घरार नाला/नदी की खुदाई करने वाले श्रमिकों का कहना है कि उनके श्रमदान को मनरेगा कार्य बताने वाले सीडीओ गंगाजल की शपथ लेकर कह दें कि हमने श्रमदान नहीं किया है। हम उनकी बात मान लेंगे। हमें झूठ बोलने की सजा स्वीकार होगी।
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52 महिला-पुरुष श्रमिकों ने सामूहिक हस्ताक्षरों से मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में शपथपूर्वक कहा है कि लॉकडाउन में वह महानगरों से गांव लौटे थे। गांव में काम नहीं मिला। हम सब खाली बैठे थे। इस पर आपस में स्वेच्छा से श्रमदान का निर्णय लिया। गंगा मइया के दर्शन के लिए श्रमदान कर रहे थे। उसी गंगा की शपथ लेकर कह रहे हैं कि हमने श्रमदान किया है।
श्रमिकों ने मुख्यमंत्री से कहा है कि हमारे श्रमदान स्थल पर सीडीओ ने मनरेगा का बोर्ड लगाकर यह कहा है कि हमने श्रमदान नहीं किया। उनके इस बयान से हम आहत हैं। सीडीओ श्रमदान से बह रही जलधारा में खड़े होकर शपथ लेकर सबके सामने कह दें कि हमने श्रमदान नहीं किया है तो हम श्रमिकों को झूठ बोलने की सजा स्वीकार है।
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श्रमिकों ने मुख्यमंत्री से अपनी टीम भेजकर इस प्रकरण की जांच कराने और सरकार की छवि धूमिल करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया है। पत्र में करीब 52 श्रमिकों के हस्ताक्षर/अंगूठा निशान हैं।
अब माऊसिंह पुरवा में श्रमदान से नहर की खुदाई
बांदा। भंवरपुर में श्रमदान को लेकर अफसरों के दावों से दरकिनार इसी क्षेत्र के एक अन्य गांव माऊसिंह पुरवा (नौगवां) में भी वहां के 40 श्रमिकों ने श्रमदान से नहर की सिल्ट खुदाई/सफाई शुरू कर दी है। श्रमिकों ने कहा कि उन्हें दो माह से कोई काम नहीं मिला। ऐसे में उन्होंने बागै नदी से निकली लिफ्ट कैनाल को अपने गांव तक खोदकर साफ करने के श्रमदान का बीड़ा उठाया है।
यह नहर गुढ़ा, बसराही, तिलहर, बुलाकी, जुगियन पुरवा, बिज्जू पुरवा, गहबरा, माऊ सिंह पुरवा, सुलेमान पुरवा से होकर दिवली तक है। जुगियन पुरवा से आगे इसमें पानी नहीं जाता। यहां नहर का वजूद लगभग मिटने जैसा है। श्रमिक देवकुमार, जीतराम, भरोसा, रामकिशोर, छोटेलाल, विजयी, कमतू, दिनेश, शिवचरन, गोरा, लक्षमनिया, अनारकली सहित 70 वर्षीय श्यामलाल श्रमदान में जुटे हैं।
श्रमिकों ने अधिकारियों से कहा है कि आकर देख लें कि श्रमदान कर रहे हैं या नहीं। मनरेगा से भी काम शुरू होने चाहिए ताकि गांव के लोगों को काम मिल सके। सामाजिक कार्यकर्ता राजाभइया का कहना है कि रोजगार के अभाव में मजदूर श्रमदान कर रहे हैं। उधर, खंड विकास अधिकारी (नरैनी) मनोज सिंह का कहना है कि श्रमदान की जानकारी नहीं है। नौगवां गांव में मनरेगा के चार कार्य चल रहे हैं। माऊसिंह पुरवा के पास मेड़बंदी और समतलीकरण का काम चल रहा है। इनमें 204 मनरेगा मजदूर कार्य कर रहे हैं।
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