बांदा। सूखे से जूझ रहे किसानों को अब यूरिया में ठगा
जा रहा है। एक तरफ अधिकारी यूरिया का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहे
हैं तो दूसरी ओर बिक्री केंद्रों में खाद की किल्लत बता किसानों से मनमाने
पैसे वसूले जा रहे हैं।
शहर की मंडी समिति स्थित यूपी एग्रो केंद्र
में सोमवार को किसानों की लंबी लाइनें लगी रहीं। ज्यादा पैसे देने वालों
को पिछवाड़े से खाद दी जाती रही।
उड़ीसा से यूरिया खाद की दो रैक और
आई हैं। इसमें 2617 मीट्रिक टन कृभको और 2633 मीट्रिक टन इफ्को की है।
सोमवार को मंडी समिति में यूपी एग्रो केंद्र के बाहर खाद के लिए सैकड़ों
किसानों की लाइन लगी रही।
केंद्र प्रभारी नवल किशोर नदारद थे। उनके
कुछ आदमी पर्चियां बनाते रहे। यूरिया खाद (नीम कोटेड) का मूल्य 348 रुपये
प्रति बोरी निर्धारित है, लेकिन किसानों से 352 रुपये लिए जाते रहे।
फुटकर न होने की बात कह केंद्र पर बैठे कर्मी 360 रुपये लेते रहे। कुछ किसानों ने विरोध किया, लेकिन किसी ने नहीं सुना।
कई किसानों ने कहा कि लाइन में लगे सभी किसानों की किसान बही काउंटर में जमा कर लेने के बाद कर्मचारी गपशप में मशगूल हो जाते हैं।
किसी
ने अलग से 10 या 20 का नोट पकड़ाया तो तुरंत पर्ची बनाकर दे देते हैं। एक
बोरी के साथ जिंक का पैकेट भी 42 रुपये का जबरदस्ती थमाया जा रहा है, जबकि
इसकी कोई जरूरत नहीं है।
यूरिया व डीएपी खाद की बफर गोदाम में कोई कमी नहीं है। किसानों से ज्यादा पैसा वसूले जाने की शिकायत मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी।
निर्धारित
रेट से ज्यादा पैसे लेने की बात सही निकली तो केंद्र प्रभारी के खिलाफ
कार्रवाई की जाएगी। किसानों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
-बाल गोविंद यादव, जिला कृषि अधिकारी, बांदा