बांदा। बसपा के बागी स्वामी प्रसाद मौर्य बांदा से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। कई दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह खबर तेजी से चल रही है। राजनीति के जानकार इसके पीछे तर्क दे रहे हैं कि दयाशंकर सिंह मामले में मुख्य निशाने पर आए बसपा के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी को भाजपा उनके गृह जिले में ही चुनौती देना चाहती है। दूसरा यह है कि यहां कुशवाहा बिरादरी के मतदाता भी ठीकठाक तादाद में हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा में शामिल होने की खबरों के साथ ही यह चर्चाएं शुरू हो गईं कि मौर्या को भाजपा बांदा में ही अपने मोहरे के रूप में प्रत्याशी बनाएगी। बसपा में रहते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे।
यहां के नसीमुद्दीन सिद्दीकी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं। दोनों की जोड़ी रही है। दल बदलने के बाद दोनों के दिल भी बदल गए हैं। एक-दूसरे पर शब्दबाण चला रहे हैं। ऐसे में भाजपा स्वामी प्रसाद को बांदा से चुनाव लड़ाकर एक तीर से कई निशाने साधने की जुगत में है। बांदा में कुशवाहा और इससे जुड़ी उपजातियों के मतदाता काफी तादाद में हैं। इसीलिए सपा और बसपा ने बांदा सदर सीट से अपने-अपने प्रत्याशी इसी बिरादरी के घोषित किए हैं।
उधर, इस बारे में भाजपा नेता कुछ खुलकर नहीं बोल रहे। जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह पटेल ने कहा कि रविवार को वे झांसी में हुई प्रदेश कार्य समिति की बैठक से लौटे हैं। फिलहाल उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। फिर भी पार्टी हाईकमान का जो भी निर्देश होगा, उसका स्वागत करते हुए जी-जान से जुटेंगे।
उधर, बसपा जिलाध्यक्ष प्रदीप वर्मा का कहना था कि स्वामी प्रसाद जो भी थे बसपा की बदौलत थे। भाजपा उन्हें मोहरा के रूप में लाना चाहती है तो वे लड़कर देख लें। बसपा का एक-एक कार्यकर्ता और यहां के मतदाता उन्हें उनकी हैसियत बता देंगे।