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परिंदा भी पर न मार पाए जैसी सुरक्षा में सेंध

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बांदा। जिला जेल में बाहुबली विधायक और गैंगस्टर मुख्तार अंसारी समेत कई प्रदेशों के खूंखार अपराधी बंद होने पर जेल की अभेद सुरक्षा है। पिछले माह सीमावर्ती चित्रकूट जिले की जेल में गैंगवार की घटना के बाद यहां जेल की सुरक्षा और बढ़ा दी गई थी। उस वक्त अफसरों ने दावा किया था कि यहां पर परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा, लेकिन दावों की कलई बंदी विजय आरख ने खोलकर रख दी और रविवार की शाम को सभी सुरक्षा व्यवस्थाओं को धता बताते हुए फरार हो गया। यह बात दीगर है कि आखिरकार बीस घंटे बाद वह घास में छिपा मिल गया। इस बाबत जेल अधिकारी कोई भी सटीक जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
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बाहुबली विधायक और गैंगस्टर मुख्तार अंसारी सात अप्रैल को पंजाब के रोपड़ जेल से बांदा मंडल कारागार लाया गया था। इसे लेकर जेल में सुरक्षा के खासे बंदोबस्त किए गए थे। सुरक्षा में 44 सीसीटीवी कैमरा, पांच बॉडी वार्म कैमरे और एक ड्रोन कैमरा निगरानी के लिए लगाया गया था। जेल के अंदर की सुरक्षा में 134 बंदीरक्षक व एक दर्जन होमगार्ड व बाहरी सुरक्षा में एक कंपनी पीएसी और 11 होमगार्ड तैनात किए गए हैं। उधर, 14 मई को चित्रकूट की जेल में गैंगवार में दो कुख्यात अपराधियों मुकीम काला और मेराज अली की हत्या के बाद अंशू दीक्षित के बाद में पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद यहां जेल की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई थी।
बताया गया था कि चित्रकूट जेल में गैंगवार में मारे गए मारे गए दो बंदी मुख्तार अंसारी के संपर्की थे। इसी के बाद दो दर्जन सशस्त्र पुलिस जवानों को जेल की बाहरी सुरक्षा में लगाया दिया गया। सीसीटीवी कैमरों से दिनरात बंदियों की निगरानी की जा रही थी। बिना अनुमति के किसी को भी जेल तो दूर परिसर में भी प्रवेश नहीं था। शाम होते ही ड्रोन कैमरा जेल परिसर में घूमने लगता था। रात में कई बार अधिकारी ड्रोन से मिलने वाली जानकारी की समीक्षा करते थे। अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर शिफ्ट में रात-दिन जेल में ड्यूटी देते हैं।
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फरार बंदी कृषि फार्म की घास में मिला
जेल से फरार बंदी विजय आरख 20 घंटे मिल गया। बंदी जेल परिसर में स्थित कृषि फार्म की घास में छुपा हुआ था। कारागार अधीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि बंदी विजय रविवार को कृषि फार्म में काम करने गया था। शाम को वापस नहीं लौटा। जेल बंद होने के पूर्व गिनती में एक बंदी के कम होने पर इसका खुलासा हुआ। बंदी की जेल परिसर के चप्पे-चप्पे में तलाश की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसकी जानकारी अधिकारियों सहित पुलिस को दी गई। इसके साथ ही शक के आधार पर जेल की चेकिंग जारी रखी गई। शाम को पांच बजे बंदी फार्म के घास में छिपा मिल गया। बंदी ने बताया कि वह भागने के इरादे से घास में छिपा था, लेकिन उसे भागने का मौका नहीं मिला। उधर, जेल के कृषि फार्म में लगी घास की नियमित कटाई होती है। ऐसे में बंदी घास में छिप गया यह प्रश्न बना हुआ।
पिछले वर्ष भी फरार हुआ था बंदी
जेल से बंदियों के भागने की लंबी फेहरिस्त है। वर्ष 2017 में जेल में प्रवेश के दौरान गेट से शहर के बिजली खेड़ा निवासी बंदी नरेंद्र फरार हो गया था। हालांकि, जेल प्रशासन ने बंदी के फरार होने का ठीकरा सिपाहियों पर फोड़ दिया था। इसमें बंदी नरेंद्र को बरेली से यहां लाने वाले दोनों सिपाही निलंबित कर दिए गए थे। इसी तरह पिछले वर्ष जुलाई माह में दहेज हत्या समेत सात केसों में बंद बंदी ममसी खुर्द निवासी बच्छराज यादव बगिया में काम करते समय बंदीरक्षकों को चकमा देकर फरार हो गया था। 46 बंदियों के साथ कमान में उसे बगिया ले जाया गया था। वापस जेल लाते समय चकमा देकर फरार हो गया था। हालांकि, एक माह बाद चित्रकूट स्थित रिश्तेदार के घर से पुलिस ने उसे पकड़ लिया था।
अप्रैल व मई में सर्वाधिक हुए निरीक्षण
मुख्तार अंसारी के अप्रैल में जेल आने व चित्रकूट की घटना के बाद से अधिकारियों ने मई माह में सर्वाधिक निरीक्षण किए। न्यायिक अफसरों ने भी जेल का जायजा लिया। डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी, आईजी के. सत्यनारायणा सहित तीन बार डीएम आनंद कुमार सिंह, एसपी डा. एसएस मीणा ने जेल का औचक निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इसके अलावा अन्य कई अधिकारियों ने भी जेल का निरीक्षण किया, लेकिन उनके निरीक्षण व सुरक्षा के दावे धरे के धरे रह गए।
आठ बंदी पर एक बंदी रक्षक
बाहुबली विधायक और गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की जेल में एंट्री के बाद जेल की सुरक्षा में 134 बंदी रक्षक लगाए गए हैं। रिक्त कारागार अधीक्षक के पद पर अरुण कुमार की तैनाती की गई। जेलर और डिप्टी जेलर के भी रिक्त पद भरे गए। पहले बंदी रक्षकों की संख्या महज 70 थी। मौजूदा समय में जेल में 1011 बंदी है। यानि की आठ बंदियों की सुरक्षा में एक बंदीरक्षक है। इसके अलावा अधिकारी भी बंदियों पर नजर रखते हैं।
चौबीस कैमरों की नजर में 447 बंदी-कैदी
महोबा। प्रदेश की कई जेलों में लगातार हो रही घटनाओं के बाद जिला उपकारागार में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जेल में 447 बंदी व कैदी इस समय निरुद्घ है। जेल में रहने वाले बंदियों की पल-पल की गतिविधि पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। मुख्य गेट से लेकर बैरकों तक 24 कैमरे लगे हैं। वर्तमान में सभी कैमरे काम कर रहे हैं। जेलर भोलानाथ मिश्र ने बताया कि जेल में सुरक्षा के पूरे इंतजाम हैं। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। वह स्वयं भी बैरकों का भ्रमण कर गतिविधि पर नजर रखते हैं। (संवाद)
चित्रकूट। रगौली जेल में 14 मई को हुए गैंगवार में दो कुख्यात अपराधियों मुकीम काला और मेराज अली की हत्या के बाद वारदात को अंजाम देने के बाद शार्प शूटर अंशू दीक्षित के पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की गई है। गैंगवार के बाद जेल परिसर में लगे 32 सीसीटीवी कैमरों में 24 खराब मिले थे। अब जेल के 15 कैमरे सही हो गए हैं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। मामले में शासन ने जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी, जेलर महेंद्र पाल, दो बंदी रक्षक व एक पीएसी जवान को निलंबित कर दिया था। साथ ही प्रयागराज परिक्षेत्र के डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी को मामले की जांच सौंपी थी। चित्रकूट की जिला जेल में इस समय 600 से अधिक बंदी/कैदी हैं। मुख्य बैरक के आसपास के कैमरे संचालित हैं। बाकी के कैमरों को बनाने का काम जारी है। (संवाद)
बंदी, कैदियों की निगहबानी 30 सीसीटीवी कैमरों से
हमीरपुर। चार सौ बंदियों की क्षमता वाली जिला कारागार में मौजूदा 770 बंदी निरुद्ध हैं। प्रभारी जेलर रामरतन यादव ने बताया कि कारागार में 14 बैरक हैं। जिनमें एक महिला बंदियों की बैरक भी है। बताया कि जेल की सुरक्षा के व्यापक इंतजाम हैं। दिन में तीन बार चेकिंग और शाम को गणना की जाती है। बताया कि जेल की सुरक्षा के लिए 30 सीसीटीवी कैमरे, पीटीजेड मास्टर कैमरा जो घूमता हुआ पूरे जेल परिसर में नजर रख रहा है। इसके साथ ही दो मेटल डिटेक्टर, हैंड मेटल डिटेक्टर हैं। जेल की बाहरी सुरक्षा के लिए चार वॉच टॉवरों का निर्माण पूरा होना वाला है। हैंडओवर होते ही यह वॉच टॉवर भी काम करने लगेंगे। (संवाद)
तीस कैमरों से 800 बंदियों की निगहबानी
उरई (जालौन)। जालौन के जिला कारागार में भी क्षमता से अधिक बंदी बंद हैं। करीब चार से पांच सौ की क्षमता वाले जिला कारागार में इस समय सात से आठ सौ बंदी मौजूद हैं। इनकी निगरानी के लिए 30 सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। हाल ही चित्रकूट जेल में हुए गैंगवार के बाद जिला कारागार में सख्ती और भी बढ़ा दी गई थी। कभी डीएम तो कभी जिला जज एसपी के साथ जिला कारागार का निरीक्षण भी कर रहे हैं। इसके अलावा जेल में योग और सत्संग के कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। यहां 2016 में जिला कारागार से तीन बंदी फरार भी हो चुके हैं। (संवाद)
सिपाही, पीआरडी जवान को धक्का देकर आरोपी फरार
कोंच (जालौन)। मेडिकल के लिए ले जाते वक्त पुलिसकर्मियों को धक्का देकर शांतिभंग का आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए कई स्थानों पर दबिश दी, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। नदीगांव निवासी राजू परिहार को पड़ोसी के साथ मारपीट के मामले में सोमवार को नदीगांव पुलिस पकड़ कर लाई थी। पुलिस ने राजू का शांतिभंग में चालान कर दिया। एक पीआरडी जवान संग सिपाही ओमप्रकाश को सीएचसी मेडिकल के लिए भेजा था। रास्ते में राजू दोनों को धक्का देकर भाग निकला। घबराए सिपाही ओमप्रकाश ने थाने पर सूचना दी तो पुलिस की गाड़ियां राजू की तलाश में इधर उधर दौड़ने लगीं, लेकिन शाम तक राजू का कुछ पता नहीं चला। थाना प्रभारी रूपकृष्ण त्रिपाठी इस संदर्भ में कुछ भी बताने से इनकार करते रहे। सीओ राहुल पांडे का कहना है कि फरार आरोपी की तलाश की जा रही है। लापरवाही बरतने वाले सिपाही व पीआरडी जवान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। (संवाद)
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