बांदा। जिला अस्पताल में जिंदगी-मौत से जूझ रहे कैंसर पीड़ित नौ वर्षीय अनाथ बच्चे की युवक ने अपना रक्त देकर जान बचाई। बच्चे के मामा ने संस्था से संपर्क साधा और ब्लड की जरूरत बताई। इस पर युवक खुद अस्पताल पहुंचा और रक्तदान के लिए अपनी सहमति जताई।
शहर निवासी नौ वर्षीय बालक अविनाश के माता-पिता पूर्व में ही खत्म हो चुके हैं। उनके मामा अजय अविनाश का इलाज व देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अविनाश कैंसर से पीड़ित है। उसका इलाज लखनऊ पीजीआई में चल रहा है। मंगलवार को अचानक उसकी तबियत बिगड़ी तो मामा अविनाश को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डाक्टरों ने इलाज किया और ब्लड की जरूरत बताई। मामा ने सेवर्स आफ लाइप संस्था के सलमान खान को फोन किया और बच्चे की हालत का वास्ता देते हुए रक्तदान की गुहार लगाई। मोबाइल ग्रुप में मैसेज पढ़कर सुनील पांडेय नामक युवक जिला अस्पताल पहुंचा और बच्चे को ब्लड देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ा दिया। आवास विकास निवासी सुनील ने बताया कि वह बाहर रहताहहै। होली के कारण यहां घर आया है। मैसेज देखा तो उससे रहा नहीं गया और अस्पताल पहुंच गया। सुनील इसके पहले भी सात बार रक्तदान कर चुका है। जीवन-मौत से जूझते बच्चे को ब्लड मिलने के बाद परिजनों के चेहरों पर खुशियां दिखीं।
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-कैंसर पीड़ित बालक के माता-पिता की हो चुकी है मृत्यु
बांदा। जिला अस्पताल में जिंदगी-मौत से जूझ रहे कैंसर पीड़ित नौ वर्षीय अनाथ बच्चे की युवक ने अपना रक्त देकर जान बचाई। बच्चे के मामा ने संस्था से संपर्क साधा और ब्लड की जरूरत बताई। इस पर युवक खुद अस्पताल पहुंचा और रक्तदान के लिए अपनी सहमति जताई।
शहर निवासी नौ वर्षीय बालक अविनाश के माता-पिता पूर्व में ही खत्म हो चुके हैं। उनके मामा अजय अविनाश का इलाज व देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अविनाश कैंसर से पीड़ित है। उसका इलाज लखनऊ पीजीआई में चल रहा है। मंगलवार को अचानक उसकी तबियत बिगड़ी तो मामा अविनाश को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां डाक्टरों ने इलाज किया और ब्लड की जरूरत बताई। मामा ने सेवर्स आफ लाइप संस्था के सलमान खान को फोन किया और बच्चे की हालत का वास्ता देते हुए रक्तदान की गुहार लगाई। मोबाइल ग्रुप में मैसेज पढ़कर सुनील पांडेय नामक युवक जिला अस्पताल पहुंचा और बच्चे को ब्लड देने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ा दिया। आवास विकास निवासी सुनील ने बताया कि वह बाहर रहताहहै। होली के कारण यहां घर आया है। मैसेज देखा तो उससे रहा नहीं गया और अस्पताल पहुंच गया। सुनील इसके पहले भी सात बार रक्तदान कर चुका है। जीवन-मौत से जूझते बच्चे को ब्लड मिलने के बाद परिजनों के चेहरों पर खुशियां दिखीं।