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घुमंतुओं के घर जले चूल्हे, 25 परिवारों को राशन

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बांदा। लॉकडाउन में अपनी रोजी रोटी और रोजगार गवां बैठे घुमंतू परिवारों के बुझे पडे़ चूल्हों की खबर का असर हुआ। प्रशासन ने 25 और कोटेदार ने 10 परिवारों को राशन बांटा। कोटेदार ने घुमंतू परिवारों को खरी खोटी सुनाई कि मीडिया तक खबर क्यों पहुंचाई।
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नरैनी तहसील के खेरवा गांव में गरीबी के दिन काट रहे कुचबंधिया घुमंतू परिवार लॉकडाउन के बाद मजदूरी नहीं कर पा रहे। उनके चूल्हे बुझे पडे़ हैं। गुरुवार (9 अप्रैल) को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद गांव के कोटेदार ने इन घुमंतू 10 परिवारों को राशन दिया। इन परिवारों को ऑनलाइन आवेदन के लिए फोटो, आधार कार्ड, बैंक पासबुक आदि की फोटोकापी जमा करने को कहा है।
केला, सुदेवी, पप्पू, रूबी, रानी, उर्मिला, महेश, अंजली, ममता आदि राशन पाने वालों में शामिल हैं। परिवारों ने बताया कि कोटेदार ने मीडिया तक खबर पहुंचाने पर उन्हें खरी खटी सुनाई। उधर, एसडीएम (नरैनी) वंदिता श्रीवास्तव ने बताया कि घुमंतू परिवारों के राशनकार्ड नहीं बने हैं, इसीलिए उन्हें राशन नहीं मिला। एसडीएम ने बताया कि गुरुवार को 25 परिवारों को राशन उपलब्ध करा दिया गया है।
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मंडल में 10,701 घुमंतू श्रमिक चिह्नित
बांदा। ‘मुसाफिर हूं यारो, न घर है न ठिकाना’। यह फिल्मी गीत चित्रकूटधाम मंडल में 10 हजार से ज्यादा घुमंतू मजदूरों के लिए हकीकत बना हुआ है। लॉकडाउन के बाद श्रम विभाग ने चारों जिलों में इन मजदूरों को सर्वे करके चिह्नित किया है। बांदा में 4033, चित्रकूट में 2108, महोबा में 2213 और हमीरपुर में 2347 (कुल 10,701) घुमंतू श्रमिक शामिल हैं।
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