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श्रीराम निवास मंदिर का अयोध्या से गहरा नाता

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श्रीराम निवास मंदिर में स्थापित राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन की प्रतिमाएं। - फोटो : BANDA
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बांदा। ‘एवमस्तु करि रमानिवासा, हरसि चले कुंभज ऋषि पासा’। अरण्यकांड की यह चौपाई शहर स्थित श्री रामनिवास मंदिर की गवाह है। अयोध्या के बाद इस मंदिर में ही प्रभु राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित हैं। बताया जाता है कि चित्रकूट जाते समय श्रीराम इस स्थान पर रुके थे।
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शहर से लगभग चार किलोमीटर दूर रामनिवास मंदिर है। पहले यह बीहड़ क्षेत्र था। रामभक्तों की सेवा से अब यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व का मंदिर है। मान्यता है कि वनवास में चित्रकूट जाते समय श्रीराम इस मंदिर स्थल पर कुछ दिन रुके थे। वामदेव और सुतीक्ष्ण ऋषि से मिलने के बाद प्रभु राम अगस्त ऋषि से मिलने गए थे। वामदेव ऋषि बांबेश्वर पर्वत पर निवास करते थे और ऋषि सुतीक्ष्ण का आश्रम केन नदी तट के पास था। अगस्त ऋषि से मिलने जाते समय भगवान राम ऋषि सुतीक्ष्ण को मार्गदर्शक के रूप में साथ ले गए थे।
इन्हीं पौराणिक महत्व से यह मंदिर सीधे अयोध्या से जुड़ता है। इस मंदिर में महंत की नियुक्ति से लेकर देखरेख का जिम्मा अयोध्या के मणिराम छावनी मंडल पर है। छावनी के महंत/रामजन्म भूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत नृत्य गोपालदास महाराज ने वर्ष 2017 में पागल बाबा (चित्रकूट) को मंदिर का पुजारी नियुक्त किया है। इसके पूर्व फलाहारी महाराज (अब गोलोकवासी) नियुक्त थे। पुजारी के मुताबिक लगभग 500 वर्ष पूर्व मंदिर की स्थापना हुई थी। अयोध्या के बाद यह पहला मंदिर है जहां राम, उनके तीनों भाई, देवी सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित हैं। किवदंती है कि द्वापर युग में वनवास के दौरान पांडवों ने कुछ दिन यहां गुजारे थे।
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दीपकों से जगमगाएगा रामनिवास मंदिर
बांदा। श्रीराम निवास सेवा समिति के सचिव विजय गुप्ता (सीए) ने बताया कि राम जन्मभूमि पूजन के दिन 5 अगस्त को राम निवास मंदिर में भी दीपमाला उत्सव मनाया जाएगा। सैकड़ों दीप से मंदिर परिसर जगमगाएगा। बताया कि मंदिर के पास स्थित निम्नी जलधारा का पुराना नाम बाण गंगा है। अर्जुन ने बाण से यहां जल निकाला था।
प्राकृतिक झरना (झिन्नन) भी आकर्षक रहा है। अब स्रोत सूख गए। बताया कि रामनिवास मंदिर में अष्टधातू की मूर्तियां स्थापित थीं। चोरी होने के बाद इनके स्थान पर जयपुर से संगमरमर की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। महंत नृत्य गोपालदास महाराज छावनी के 100 संतों के साथ खुद प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए थे।

महंत नृत्य गोपालदास महाराज से आशीर्वाद लेते मंदिर सेवा समिति सचिव विजय गुप्ता। (फाइल फोटो)- फोटो : BANDA

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