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इल्म की रोशनी फैला रहे मौलाना उस्मान

Mon, 18 Apr 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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हिंदू-मुस्लिम बच्चों को पढ़ाते मौलाना उस्मान। - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। मदरसों पर भले ही तरह-तरह की उंगली उठती हों पर यहां अति पिछड़ क्षेत्र में संसाधनों से महरूम मदरसा सांप्रदायिक सद्भाव और गरीब हिंदू-मुस्लिम बच्चों को मुफ्त तालीम दे रहा है। इसकी कमान संभाल रखी है परास्नातक और मदरसा शिक्षक की कई डिग्री धारक मौलाना उस्मान अजहरी ने।
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अति गरीबों की बस्ती कांशीराम कालोनी (हरदौली घाट) में रोजाना सुबह तीन घंटे एक खाली पड़े फुटपाथ पर बांस-बल्ली से की गई छाया में मदरसा चल रहा है। इसमें 57 बालक-बालिकाएं तालीम हासिल कर रहे हैं। इनमें 22 लड़के-लड़कियां हिंदू धर्म के हैं। किसी भी बच्चे से धेला भर फीस तो दरकिनार उल्टे उन्हें यहां पेन, पेंसिल, कापी, किताबें भी मुफ्त मिल रही हैं। यह कोई और नहीं बल्कि बच्चों को पढ़ाने का जुनून और जज्बा लिए बैठे मौलाना उस्मान कर रहे हैं। वह अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं।

किसी से एक रुपया मदद नहीं ले रहे। मौलाना उस्मान पुलिस लाइन स्थित मस्जिद मेें इमामत और कुछ बड़े घरों मेें जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना खर्च पूरा करते हैं। उनका कहना है कि जब मुल्क में चारों तरफ नफरत और भेदभाव की सियासत का अंधेरा लाया जा रहा हो तब ऐसे में कुछ उम्मीदों की मशाल भी जलानी जरूरी है। मदरसे की नेहा वर्मा, शालिनी गुप्ता, मोहित, महिमा, एकता, सिमरन यादव, प्रिया सोनी, रजनी देवी, राजू पाल और रमेश तिवारी छात्र-छात्राएं बताते हैं कि उन्हें मदरसा रूप इस पाठशाला में मुफ्त शिक्षा बेहतर ढंग से मिल रही है। मौलाना उस्मान परास्नातक और आमिल, फाजिल व कारी की डिग्री लिए हुए हैं। डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी भी कर रखा है। कांशीराम कालोनी के लोगोें को मुफ्त फिजियोथेरेपी की सेवा दे रहे हैं। इतना सब करने के बाद भी वह शोहरत और प्रचार से दूर रहते हैं। गुमनाम रहकर अपना फर्ज अदा कर रहे हैं। मौलाना उस्मान यहां के सांड़ासानी (कमासिन) गांव के मूल बाशिंदे हैं।
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