बांदा। नागरिकों की सेहत को लेकर प्रदेश सरकारें कितना संजीदा रहीं? इसकी बानगी चित्रकूटधाम मंडल के सरकारी अस्पताल हैं। 45 लाख से ज्यादा आबादी वाले मंडल में न्यूरो, कैंसर और मानसिक रोगियों की तादाद लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रदेश सरकार या स्वास्थ्य मंत्रालय ने चारों जिलों के जिला स्तरीय अस्पतालों में भी इन रोगों के विशेषज्ञ नियुक्त करता तो दूर पदों का सृजन भी नहीं किया है।
अन्य कई गंभीर रोगों के विशेषज्ञों के पद चारों जिलों में खाली पड़े हैं। यह आश्चर्यजनक सच्चाई किसी और ने नहीं बल्कि प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जयप्रताप सिंह ने खुद बयां की है।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हर साल भारी भरकम बजट खर्च किया जा रहा है। जिला मुख्यालयों में करोड़ों रुपये से जिला स्तरीय अस्पतालों की बिल्डिंगें बन रही हैं। महंगे कुछ उपकरण भी खरीदे गए हैं। लेकिन जानलेवा और गंभीर रोगों के इलाज की सुविधा यहां मुहैया नहीं है।
गुरुवार को प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने विधान परिषद में सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीकी द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित जवाब में चित्रकूटधाम मंडल के जिला स्तरीय अस्पतालों की कलई खोलने वाली हकीकत बयां की है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बांदा, हमीरपुर और महोबा के महिला जिला चिकित्सालयों में त्वचा, मानसिक, न्यूरो, कैंसर और हृदय रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत नहीं हैं।
मंत्री द्वारा बयां की गई मंडल के अस्पतालों की स्थिति-
बांदा : जिला चिकित्सालय (पुरुष) में न्यूरो, कैंसर और मानसिक रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत नहीं हैं। हृदय रोग विशेषज्ञ का सिर्फ एक पद स्वीकृत है वह कार्यरत हैं। त्वचा रोग का इकलौता स्वीकृत पद रिक्त पड़ा हुआ है।
चित्रकूट : जिला संयुक्त चिकित्सालय में न्यूरो, कैंसर और मानसिक रोग विशेषज्ञ के पद स्वीकृत ही नहीं हैं। इनके हृदय रोग और त्वचा रोग के एक-एक पद स्वीकृत हैं, लेकिन दोनों ही रिक्त पड़े हुए हैं।
हमीरपुर : जिला चिकित्सालय (पुरुष) में मानसिक, न्यूरो और कैंसर विशेषज्ञ के पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं। इस अस्पताल में त्वचा व हृदय रोग विशेषज्ञ पद स्वीकृत हैं, लेकिन यह रिक्त पड़े हैं।
महोबा : जिला चिकित्सालय में भी न्यूरो, कैंसर और मानसिक रोग विशेषज्ञों के पद स्वीकृत नहीं हैं। अलबत्ता हृदय रोग एवं त्वचा रोग विशेषज्ञ का एक-एक पद स्वीकृत है, लेकिन दोनों ही खाली है।
कब होगी तैनाती? जवाब में मंत्री ने बता दिए नियम
बांदा। विधान परिषद सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीकी द्वारा यह पूछे जाने पर कि उको्त रोगों के विशेषज्ञों के पद सृजित कर तैनाती किए जाने पर क्या सरकार विचार करेगी? इसके जवाब में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित चिकित्साधिकारियों की शैक्षिक अर्हता एमबीबीएस है। आयोग से चयनित चिकित्साधिकारियों में विशेषज्ञ चिकित्साधिकारियों/सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सकों की उपलब्धता के आधार पर तैनाती की जाती है।
ब्लड बैंक और कंपोनेंट सेप्रेशन यूनिट चालू
बांदा। नसीमुद्दीन सिद्दीकी द्वारा पूछे गए एक अन्य सवाल कि बांदा के जिला महिला व पुरुष अस्पताल में कौन-कौन से कंपोनेंट यूनिट स्थापित हैं, यह कब स्थापित हुए? इनकी क्षमता क्या है? रोगियों को इसका लाभ मिल रहा है या नहीं? इस पर चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि एक जनपद में एक ही रक्त कंपोनेंट सेप्रेशन यूनिट स्थापित करने का मानक है।
बांदा के जिला पुरुष चिकित्सालय में ब्लड बैंक/कंपोनेंट सेप्रेशन यूनिट स्थापित है और चल रही है। मंत्री ने बताया कि पुरुष चिकित्सालय में रक्त कोष की स्थापना 4 जुलाई 1997 और ब्लड कंपोनेंट सेप्रेशन यूनिट 2 सितंबर 2011 को स्थापित की गई थी। यहां रक्त कलेक्शन की क्षमता 300 यूनिट, प्लाज्मा की 300 यूनिट और प्लेटलेट्स की क्षमता 24 यूनिट है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यहां यूनिट के लिए पर्याप्त स्टाफ कार्यरत है।