घर के आंगन और छत की मुंडेर पर चीं-चीं की गूंज फिर आबाद करने के लिए विलुप्त हो रही गौरैया को संरक्षण देने की कवायदें तेज की जा रही हैं। स्वयंसेवी संगठन और वन विभाग मिल जुलकर यह अभियान चला रहे हैं।
इसी क्रम में छह मार्च (रविवार) को नरैनी क्षेत्र के मोहनपुर गांव में गौरैया का ब्याह रचाया जाएगा। 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ पर चौपाल होगी। वन विभाग गौरैया के लिए छोटे आशियाने (घोंसले) बनाकर बांट रहा है।
एक दशक पहले तक घर के आंगन गौरैया की चीं-चीं से गूंजते रहते थे। पिछले कुछ सालों से इनकी संख्या तेजी से घट रही है। इसे लेकर वन विभाग और कई स्वयंसेवी संगठन सक्रिय हुए हैं।
आम लोगों में गौरैया को बचाने और बढ़ाने के लिए ‘हमारा प्रयास, गौरैया प्रवास’ मिशन चलाया जा रहा है। छह मार्च को स्वयंसेवी संगठन प्रवास सोसायटी मोहनपुर गांव में गौरैया के विवाह का आयोजन करेगा। सोसायटी के आशीष सागर ने बताया कि गौरैया को प्रतीकात्मक दुल्हन और नर चिड़वा को दूल्हा बनाकर शादी की रस्म अदा की जाएगी।
विदाई पालकी में होगी। मोहनपुर के प्राइमरी स्कूल में आम के पत्तोें का मंडप बनेगा। कन्यादान की रस्म शिक्षक यशवंत पटेल और सुमनतला पटेल करेंगे। वर पक्ष का दायित्व रानीपुर गांव के राम प्रकाश और उनकी पत्नी अदा करेंगी। अद्भुत विवाह को देखने के लिए कई गांवों के लोग आएंगे। आयोजन का मकसद लोगों को गौरैया का संरक्षण देने की प्रेरणा देना है।