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मुख्तार से सौ मीटर की दूरी तक कोई फटक भी नहीं सकता

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बांदा। गैंगस्टर बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को जेल में रहने का लगभग 13 वर्षों का तजुर्बा है, लेकिन शायद मौजूदा समय में वह फिलहाल सबसे ज्यादा बंदिशों और दुश्वारियों के दौर से गुजर रहा है। पंजाब से बांदा लाए जाने का मुख्तार का मुद्दा बेहद सुर्खियों में पूरे देश में रहा। बुधवार (7 अप्रैल) को तड़के मुख्तार की बांदा जेल में एंट्री के बाद से ही प्रदेश के गृह मंत्रालय और जेल महानिदेशालय ने तीसरी आंख (सीसीटीवी कैमरे) से यहां अपनी निगाहें गड़ा दी हैं।
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दोनों ही विभागों के आला अफसर पल-पल बांदा जेल की न सिर्फ खबर ले रहे हैं, बल्कि जेल का चप्पा-चप्पा 24 घंटे स्क्रीनिंग पर देख रहे हैं। पिछली बार मुख्तार बांदा जेल में करीब 22 माह रहा। 27 माह पहले जनवरी 2019 में यहां से पंजाब ले जाया गया था। वहां कांग्रेस की सरकार है। लगातार आरोप लगते रहे कि मुख्तार अंसारी को रोपड़ जेल में मेहमानों की तरह रखा जा रहा है। यह मुद्दा लगातार चर्चित और सुर्खियों में रहा। प्रदेश सरकार की जीतोड़ कोशिश और पैरवी पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश वापस भेजने का आदेश दिया। अंतत: मुख्तार अंसारी वापस बांदा जेल लाया गया।
मुख्तार को यह मुगालता रहा होगा कि पिछली बार की तरह अबकी भी बांदा जेल में उसे राहत रहेगी, लेकिन यह गलत साबित हुआ। अबकी जेल की दुनिया बदली हुई है। बंदिशें और शिकंजा बेहद ज्यादा है। मुख्तार की बैरक तक पहुंचना तो दरकिनार, बैरक से करीब 100 मीटर दूर भी कोई फटक नहीं पा रहा। रास्ते में ही बैरिकेडिंग लगाकर सुरक्षा कर्मी तैनात कर दिए गए हैं। मुख्तार की बैरक संख्या 15 पूरी तरह सुनसान है। सुविधा के नाम पर सीलिंग फैन और घड़ों में पीने का पानी है। सीसीटीवी कैमरे से बैरक के हर चप्पे पर नजर रखी जा रही है। बृहस्पतिवार को लखनऊ स्थित जेल महानिदेशालय के स्क्रीनिंग रूम में जेल महानिदेशक आनंद कुमार ने खुद बैठकर सीसीटीवी कैमरे के स्क्रीनिंग पर बांदा जेल का हर कोने से नजारा देखा।
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बंदिशों के बाद भी आम बंदियों को परेशानी नहीं
बांदा। जेल की व्यवस्थाओं में तमाम सख्तियों और बंदिशों के बावजूद आम बंदियों की दैनिक दिनचर्या और प्रक्रिया में कोई रोड़ा नहीं आ रहा है। यह दावा है कि यहां के जेल प्रशासन का। बांदा जेल के जेलर पीके त्रिपाठी का कहना है कि जेल की सामान्य प्रक्रियाएं पूर्ववत चल रही हैं। मसलन कोर्ट में तलब बंदियों को भेजा जा रहा है। जिनकी रिहाई के आदेश आए हैं, उन्हें रिहा किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बंदियों की पेशी कराई जा रही है। बताया कि पूर्व की भांति बंदियों को अपने किन्हीं दो चिह्नित परिजनों से फोन पर संक्षिप्त बातचीत कराने की सुविधा भी बहाल है। इसमें बंदी से शपथपत्र लिया जाता है। बंदियों के परिजनों से अर्जी लेकर बंदियों के लिए दिया जाने वाला सामान काउंटर पर जमा किया जा रहा है। जेलर ने कहा कि जेल में 1099 बंदी हैं। स्टाफ पूरा है। इस सवाल पर कि नए बंदी (मुख्तार) के आने पर उनके लिए क्या खास किया गया है, इस पर कहा कि सभी बंदी समान हैं। जेल मैन्युअल के तहत सभी को सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। (ब्यूरो)
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नए किरायेदार पुलिस के रडार में
बांदा। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की बांदा जेल में आमद के साथ ही शहर में आने वाले नए किरायेदारों की शामत आ गई है। इनका पूरा चिट्ठा पुलिस खंगाल रही है। शक यह है कि मुख्तार के लोग किराये के मकानों में कहीं अड्डा न जमा लें। पिछली बार मुख्तार के यहां जेल में रहते ऐसा हुआ था। पुलिस ने जेल के इर्दगिर्द से लेकर लगभग पूरे शहर में नए आने वाले लोगों पर निगाहें गड़ा दी हैं। किराये वाले मकानों के स्वामियों को आगाह किया जा रहा कि किसी भी संदिग्ध किरायेदार को न ठहराएं। किराये पर मकान दें तो किरायेदार का पूरा ब्योरा पुलिस को मुहैया कराएं। इसके लिए पुलिस ने निर्धारित प्रारूप तैयार किया है। यह मकान मालिकों को दिया जा रहा है। बांदा कोतवाली पुलिस के कई पुलिसकर्मी इसी काम में लगाए गए हैं। ऐसे में तमाम गृहस्वामी अपने मकान किराये में देने से कतरा रहे हैं। उधर, पुलिस ने उन लोगों की भी तलाश शुरू कर दी है जो पिछले एक पखवाड़े के अंदर बांदा जेल पहुंचे हैं। आशंका जताई जा रही कि मुख्तार के लोग छोटी-मोटी धाराओं में अपना चालान कराकर या पुराने किसी केस की जमानत खारिज कराकर जेल पहुंच सकते हैं। ऐसे लोगों की पुलिस ने सूची तैयार की है। (ब्यूरो)
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चौबीस घंटे में डिप्टी जेलर, बंदी रक्षकों की नियुक्ति
बांदा। गैंगस्टर और बाहुबली मुख्तार अंसारी के बांदा जेल आने के बाद जेल मुख्यालय लखनऊ ने बांदा जेल में लंबे अरसे से रिक्त पदों पर आननफानन नियुक्तियां शुरू कर दी हैं। अंसारी की जेल में एंट्री के 24 घंटे के अंदर ही बांदा जेल को दो डिप्टी जेलर और 35 बंदी रक्षक मिल गए। पूर्व में यहां मात्र 15 बंदी रक्षक थे। इन सभी को स्थानांतरित कर दिया गया है। डिप्टी जेलर की संख्या बढ़कर चार हो गई है। अलबत्ता अधीक्षक की कुर्सी खाली है। अधीक्षक आरके सिंह लंबे अवकाश पर हैं। माना जा रहा कि जल्द ही यहां शासन नए जेल अधीक्षक की नियुक्ति कर देगा। उधर, जेल अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार शासन ने सिटी मजिस्ट्रेट को दे दिया था, लेकिन यहां सिटी मजिस्ट्रेट बुधवार से कोरोना पॉजिटिव होने के बाद क्वारंटीन हैं। (ब्यूरो)
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