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कहीं कैश खत्म, कहीं रही मारामारी

Wed, 16 Nov 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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एसबीआई मुख्य शाखा में लाइन में लगे लोगों के परिचय पत्र जांचते प्रभारी निरीक्षक केपी सिंह व अन्य पुलिस कर्मी - फोटो : अमर उजाला
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 बैंकों में रुपये निकालने और पुराने नोट बदलने वालों की मुसीबत कम नहीं हो रही। बुधवार को अधिकांश बैंकों में खुलने के चार घंटे बाद ही कैश खत्म हो गया। लाइन में लगे लोग मायूस होकर लौट गए। रिजर्व बैंक के स्याही लगाने का आदेश भी ठीक से अमल नहीं हो पाया।
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एसबीआई मुख्य शाखा, कचहरी
यहां पुरुष व महिलाओं के अलग-अलग काउंटरों में लंबी कतार लगी रही। पुरुषों की उंगली में स्याही लगाई गई। लेकिन महिलाओं के स्याही नहीं लगाई गई। बुधवार को कोई राजनीतिक दल व समाजसेवी पानी पिलाने नहीं आया। बैंक की ओर से कोई व्यवस्था नहीं थी। चहेतों, रसूखदारों का लेन-देन अंदर से हुआ तो लोगों ने विरोध करते हुए शोर मचाया। पुलिस कर्मियों ने दखल देकर शांत कराया।

बैंक आफ इंडिया, पद्माकर चौराहा
यहां सुबह से ही चैनल पर कैश खत्म होने का बोर्ड लगा दिया गया था। बताया गया कि खजाने में 100 और 50 के नोट नहीं है। 500 और 1000 के पुराने नोट के सिवा उनके पास करेंसी नहीं है। रुपये निकालने वाले बैरंग लौट गए। सिर्फ रुपये जमा हुए।
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पंजाब नेशनल बैंक, छावनी
यहां मेन रोड पर लंबी कतारों से आवागमन बाधित रहा। अलग-अलग कतार न होन से रुपये निकालने वालों के साथ जमा करने वालों को भी घंटों लाइन में लगना पड़ा। बैंक के अंदर पहुंचने में दो से तीन घंटे लग गए।

यहां खाते से रुपये निकालने वालों को सिर्फ 1000 रुपये से संतोष करना पड़ा। एक दिन पहले 2000 रुपये देने के बाद बुधवार को कैश की कमी बताकर प्रत्येक खाताधारक को 1000 रुपये दिए गए। रुपये निकालने वालों को भी स्याही लगाई गई।

यहां दोपहर दो बजे चैनल बंद होने पर लाइन में लगे खाताधारक गार्ड से झगड़ते रहे। नोकझोंक के बाद पुुलिस कर्मियों ने लोगों को खदेड़ दिया। बैंक के अंदर लाइन में लगे लोगों के ही रुपये बदले गए। स्याही न होने पर काले पेन से निशान लगाए गए।


एसबीआई मुख्य शाखा में तमाम मजदूर तबके के युवकों के हाथ में 1000 और 500 रुपये के नोट देख पुलिस ने इनसे पूछताछ शुरू की। पता चला कि यह 400 रुपये दिहाड़ी पर कुछ धन कुबेरों के लिए नोट बदलने आए थे। कोतवाली प्रभारी केपी सिंह ने उनकी पहचान पत्रों की जांच की। पूछताछ में पता चला कि वह दूसरे के लिए रुपये बदलने आए थे। लगभग 200 लोगों को चिह्नित कर बाहर किया गया।

 बेटियों के शादी के कार्ड रिश्तेदारियों में बांट चुके परिवार अब रुपये न होने से परेशान हैं। स्योढ़ा (नरैनी) के भगवानदीन वर्मा ने कहा कि उसकी बेटी की 23 नवंबर को बारात आनी है। सप्ताह भर बचे हैं। सभी जगह आमंत्रण कार्ड बंट चुके हैं। उसने 25000 रुपये इकट्ठा किए। लेकिन गिरवां में सेंट्रल बैंक शाखा में नोट नहीं बदले जार हे। वह शादी का सामान नहीं खरीद पा रहा है। शादी टूटने का खतरा पैदा हो गया है। उधर, शंकर नगर मोहल्ला निवासी मीरा देवी ने डीएम के यहां फरियाद की। कहा कि उसकी पुत्री राखी की शादी 21 नवंबर को है। शहडोल से बारात आ रही है। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक कालूकुआं शाखा में खाताधारक है। उसके रुपये खाते में जमा हैं। लेकिन मैनेजर ने रुपये निकालने से मना कर दिया है।

 हिंदुस्तान किसान यूनियन राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र तिवारी ने कहा है कि पीएम के नोट बैन का फैसला सराहनीय है, पर किसानों को लाइन में खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि किसान आयोग गठन, कर्जमाफी, बिजली बिल माफी, समर्थन मूल्य बढ़ाने आदि जैसे मुद्दों पर पीएम ने अनदेखी की है। पहले से दैवीय आपदा से परेशान किसानों के घर बेटियों की शादियां रुक गई हैं। किसान सदमे में दम तोड़ रहे हैं।
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