बांदा। सूखे से कराह रहे बुंदेलखंड के किसानों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। धान किसानों पर पहले कुदरत की मार पड़ी। जो थोड़ी बहुत फसल हुई तो उसकी कीमत खरीददार विभाग दाबे बैठे हैं। ऐसे में किसानों से हमदर्दी संबंधी शासन के दावों की सच्चाई अपने आप सामने आ रही है। एक तरफ उन्हें राहत राशि देने के ढोल पीटे जा रहे हैं, दूसरी तरफ उनकी खुद की मेहनत का पैसा अदा नहीं किया जा रहा। चित्रकूटधाम मंडल में सरकारी एजेंसियों को धान बेंचने वाले करीब 600 किसानों का लगभग एक करोड़ रुपया नहीं दिया गया है। सरकारी एजेंसियों ने किसानों से 39600 मीट्रिक टन धान खरीदा था।
चित्रकूटधाम मंडल में मात्र बांदा और चित्रकूट जिलों में ही धान की खेती होती है। धान बेचने वाले सैकड़ों किसान अब भुगतान के लिए संबंधित विभागों के अफसरों व खरीद केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। पिछले साल अक्तूबर में शुरू हुई धान खरीद में बांदा और चित्रकूट जिले में 39600 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य था। सूखे के बावजूद किसानों ने नलकूपों व निजी बोरिंग से सिंचाई कर फसल तैयार की। मंडल में लक्ष्य के सापेक्ष 100 फीसदी धान की खरीद हुई।
संभागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय के मुताबिक लगभग 27 हजार किसानों से तकरीबन 65 करोड़ रुपये का धान खरीदा गया था। किसानों को नगद भुगतान का आदेश था। इसके तहत आरटीजीएस के जरिए किसानों के खाते में 24 घंटे के अंदर धनराशि भेजने के निर्देश थे लेकिन खरीद खत्म हुए ढाई महीने हो चुके हैं और एनसीसीएफ और नैकफ ने अभी भी करीब 600 किसानों का लगभग एक करोड़ रुपया अदा नहीं किया है।
इस बाबत क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक अशोक कुमार का कहना है कि बकाएदार एजेंसियों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं भेजी है। एफसीआई में भुगतान फंसने से एजेंसी भी भुगतान नहीं कर सकीं। इसी वजह से कुछ किसानों का भुगतान अटका था। बाद में उन्हें बताया गया कि कोई भुगतान बाकी नहीं है। अब वह इस बारे में और पता करेंगे। उधर, एनसीसीएफ के क्षेत्रीय प्रबंधक एसएन सिंह का कहना है कि धान खरीदकर मिलों को भेजा जाता है। वहां से सीएमआर (धान की कुटाई) के बाद एफसीआई खरीदकर भुगतान करती है। तभी किसानों का भुगतान किया जाता है। सीएमआर में देरी की वजह से भुगतान में विलंब हुआ है।