बबेरू। अवधूत महराज मौनी बाबा आश्रम सिमौनीधाम मेला
की तैयारियां पूरी हो गईं। शिष्यों द्वारा भेजी सैकड़ों क्विंटल खाद्य
सामग्री भंडारा स्थल पहुंच गई।
मालपुआ और पकवान बनाने वाले रसोइये
भी बाहर से आए हैं। दूर-दराज से आए साधु-संतों ने मेला परिसर में डेरा डाल
दिया है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं।
तीन
दिवसीय सिमौनीधाम मेला की शुरुआत 15 दिसंबर से होगी। हजारों श्रद्धालुओं
को एक साथ भोजन कराने के लिए लंबे-चौड़े 10 पंडाल बनाए गए हैं।
पांच
पंडालों में महिला और पांच पंडालों में पुरुष श्रद्धालुओं की पंगत लगेगी।
150 क्विंटल नमकीन, 100 क्विंटल पेठा और 150 क्विंटल बूंदी (मिठाई) की खेप
अवधूत महाराज के शिष्यों द्वारा यहां पहुंचाई जा चुकी है।
आगरा से
मालपुआ बनाने के लिए आए 100 रसोइयों ने अपने माफिक भट्ठियां तैयार करवाई
हैं। आलू भरे ट्रक भी मेला में पहुंच गए हैं। हरी सब्जी प्रतिदिन यहीं
खरीदी जाएगी।
पूड़ी, जलेबी, मालपुआ और सब्जी पकाने के लिए अलग-अलग
भट्ठियों में रसोइयों के साथ श्रमदानियों की ड्यूटी लगाई गई है। मेला परिसर
में बाहर से आए साधु संतों ने डेरा डाल दिया है।
उधर, भंडारा शुरू
होने के पहले अवधूत महराज के शिष्य यहां पहुंचकर व्यवस्था संभालने के साथ
श्रमदान भी कर रहे हैं। मेला की पुरुष व महिला कांस्टेबलों समेत पीएसी
तैनात की गई है।
सुरक्षा कर्मियों ने यहां आमद दर्ज कराना शुरू कर
दिया है। सफाई व्यवस्था के लिए पंचायतीराज विभाग, नगर पंचायत बबेरू व
तिंदवारी और बांदा व अतर्रा नगर पालिका से सफाई कर्मी लगाए गए हैं।
भंडारा
के साथ दिन में रासलीला और रात को रामलीला का मंचन होगा। इसके लिए भव्य
पंडाल बनाया गया है। बिजली, पानी व्यवस्था भी दुरुस्त कर ली गई।
सिमौनीधाम
मेला में भंडारा के साथ प्रदर्शनी भी सज गई हैं। क्षेत्रीय व दूर-दराज से
आए व्यापारियों ने दुकानें लगाई हैं। सरकारी विभागों ने केंद्र व प्रदेश
सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के लिए स्टाल लगाए हैं।
देश के
विभिन्न प्रांतों से आए बड़ी संख्या में हस्त शिल्पकारों ने प्रदर्शनी में
कलाकृतियां सजाईं हैं। विकास आयुक्त हस्तशिल्प हथकरघा वस्त्र मंत्रालय भारत
सरकार की ओर से 50 स्टाल लगाने को स्वीकृति दी गई है।
सिमौनीधाम
में 85 फीट ऊंची भगवान शिव की मूर्ति और 110 फीट लंबी हनुमान की लेटी
प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है। अवधूत महराज के गुरु मौनी बाबा की समाधि पर
आस्थावान मत्था टेक रहे हैं।
यहां साल भर अखंड रामधुन कीर्तन चलती रहती है। मेले में तीनों दिन रासलीला और रात में रामलीला का मंचन होगा।