मंदिर और धर्मस्थलों से संबंद्ध खेती की भूमि में होने वाली उपज की सरकारी खरीद केंद्रों में अब भगवान के आधार का अड़ंगा नहीं लगेगा। सबंधित ट्रस्टी के ही आधार/अभिलेख से फसल बेची जा सकेगी। यह बात प्रदेश के कृषि राज्यमंत्री/जनपद प्रभारी लाखन सिंह राजपूत ने बुधवार को यहां मीडिया से कही।
मंडल के तमाम मंदिरों में लगी हुई भूमि की फसल (गेहूं) सरकारी खरीद केंद्रों में यह कहकर नहीं खरीदी जा रही थी कि संबंधित मंदिर के देवता/भगवान के नाम का आधार कार्ड लगाकर रजिस्ट्रेशन कराएं। अमर उजाला ने ये खबर पहली जून को मंडल के 34 मंदिरों को हवाला देते हुए प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
बुधवार को यहां कलेक्ट्रेट सभागार में मीडिया से वार्ता के दौरान इस खबर की ओर ध्यान आकृष्ट कराए जाने पर उन्होंने कहा कि भगवान के नाम आधार कार्ड नहीं होता। मंदिर या ट्रस्ट का सर्वहारा अपना आधार कार्ड लगाकर मंदिर की फसल बेच सकता है।
उन्होंने कहा कि मृत किसानों के आश्रितों की खतौनी और वरासत 30 दिन के अंदर जारी की जाएगी। मीडिया वार्ता में डीएम आनंद कुमार सिंह, एसपी डॉ. सिद्धार्थ शंकर मीणा, सिटी मजिस्ट्रेट केशव नाथ, भाजपा जिलाध्यक्ष रामकेश निषाद, सांसद प्रतिनिधि स्वदेश शिवहरे गोलू आदि मौजूद रहे।