बांदा/ बबेरू। बेटी के हत्यारोपी सिपाही की पत्नी को लगातार चौथे दिन भी कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में होश नहीं आया है। डॉक्टरों के मुताबिक, शिवानी के दिमाग में तवा के भारी प्रहार से खून के थक्के जम गए हैं, इससे वह कोमा में चली गई है। उधर, हत्यारोपी सिपाही की तलाश में शनिवार को एसडीआरएफ की टीम ने यमुना नदी में आठ किलोमीटर तक सर्च अभियान चलाया, लेकिन कुछ पता नहीं चला।
फर्रुखाबाद के मऊ दरवाजा थाना क्षेत्र के गढ़ कुइयां कूट गांव निवासी गौरव कुमार यादव वर्तमान में मरका थाने में डायल-112 में चालक के पद पर तैनात था। पड़ोसियों के मुताबिक वह मरका थाना से कुछ ही दूरी पर किराये पर पत्नी शिवानी (25) व तीन वर्षीय बेटी परी के साथ रह रहा था। बुधवार को वह सुबह ड्यूटी करके घर लौटा था।
दोपहर बाद पत्नी शिवानी और बेटी को कस्बे में मकर संक्रांति का मेला दिखाने साथ ले गया था। वहां से लौटने के बाद रात करीब नौ बजे उसका पत्नी से किसी से बात करने को लेकर विवाद हो गया। तैश में आकर सिपाही ने पत्नी पर हमला कर दिया। इस बीच उसकी बेटी बीच में आ गई तो उस पर भी तवा से ताबड़तोड़ वारकर बेटी की हत्या कर वह कमरे में ताला लगाकर भाग निकला था।
हत्यारोपी सिपाही की पत्नी शिवानी के पिता ने सिपाही समेत सात ससुरालियों पर हत्या, उत्पीड़न और दहेज मांगने की धारा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वारदात के बाद वह यमुना नदी में कूद गया था। पुलिस ने हत्यारोपी सिपाही की पत्नी शिवानी को रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में पहुंचाया था। यहां से डॉक्टरों ने उसे कानपुर रीजेंसी में भर्ती कराया था।
लखनऊ से आई एसडीआरएफ टीम प्रभारी अनुपम कुमार की 11 सदस्यीय टीम ने चौथे दिन भी एक स्टीमर, एक नाव से चरका गांव के आगे तक आठ किलोमीटर का एरिया सर्च अभियान में शामिल किया गया। नदी में एक महाजाल, दो छोटे जाल डाले गए। लेकिन हत्यारोपी सिपाही का कहीं पता नहीं चल सका। मरका थाना इंस्पेक्टर मिथलेश सिंह ने बताया कि यमुना नदी में सर्च अभियान जारी है। सिपाही का पता नहीं चल सका है।