हाईकोर्ट के फैसले से आहत शिक्षामित्रों ने मंगलवार को मंडल मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। भाजपा कार्यालय के नजदीक कुछ देर मुख्य सड़क पर धरना दिया, जिससे जाम के हालात बन गए। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर सवाल उठाया कि शिक्षामित्र कहां दोषी हैं, जिसकी उन्हें ऐसी सजा दी गई।
उधर, बीएसए को ज्ञापन देकर बकाया भुगतान की मांग करते हुए घोषणा की कि वे स्कूलों में ड्यूटी नहीं करेंगे, बीआरसी में हाजिरी दर्ज कराएंगे। मंगलवार को दोपहर बाद सैकड़ों की तादाद में महिला-पुरुष शिक्षामित्र डायट परिसर में इकट्ठा हुए। यहां से जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए बीएसए कार्यालय पहुंचे।
बीएसए ओपी त्रिपाठी को पांच सूत्री ज्ञापन दिया। इसमें मानदेय का बकाया भुगतान, द्वितीय चरण के समायोजित शिक्षामित्रों का सत्यापन और वेतन, विद्यालय कार्य के लिए मजबूर न करने की मांग की गईं। बताया कि वे शिक्षण कार्य में सहयोग नहीं करेंगे, बीआरसी में उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
साथ ही इंचार्ज प्रधानाध्यापक के दायित्व से मुक्त करने की मांग की। बेसिक शिक्षामित्र संयुक्त संगठन के बैनर तले आंदोलित ये शिक्षामित्र बीएसए कार्यालय से निकलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। एडीएम डीएस पांडेय को सीएम के नाम से संबोधित ज्ञापन दिया।
फिर शिक्षामित्रों का हुजूम पीलीकोठी स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचा। वहां ओवरब्रिज से लेकर पीलीकोठी तक धरना देकर सड़क जाम कर दी। लगभग आधा घंटा अफरातफरी के बीच यातायात ठप रहा। कुछ देर बाद भाजपा सांसद भैरौं प्रसाद मिश्र आए और शिक्षामित्रों से पीएम के नाम संबोधित ज्ञापन लिया।
भरोसा दिया कि उनकी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाएंगे। ज्ञापन के बाद शाम करीब 5 बजे शिक्षामित्रों का आंदोलन खत्म हो गया। इस दौरान जहां से भी शिक्षामित्रों को जुलूस गुजरा वहां यातायात व्यवस्था चरमरा गई। देर तक जाम लगा।
आंदोलन की अगुवाई शिक्षामित्र संगठनों के नेता दिनकर अवस्थी और मूलचंद्र सोनी आदि ने की। नरैनी क्षेत्र से आई शिक्षामित्र सुधा प्रदर्शन के दौरान बेहोश हो गई। अन्य महिला शिक्षामित्रों ने पानी के छींटे मारकर होश में लाया। जुलूस के साथ पुलिस बल मौजूद रहा।