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कड़ी सजा का प्रावधान, फिर भी व्यापारी बेखौफ

Mon, 06 Mar 2017 12:19 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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भट्ठी में खोया बनाता युवक। - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
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होली का त्योहार नजदीक आते ही मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। मिलावट में कड़ी सजा के प्रावधानों के बावजूद व्यवसायी खाने-पीने की चीजों में बेखौफ मिलावट कर रहे हैं। रंगों की मस्ती और पकवानों का स्वाद चखने वाली होली के त्योहार का मजा मिलावटखोर बिगाड़ सकते हैं। बेखौफ धंधेबाज होली की मंडी में मिलावटी खाद्य सामग्री खपाने की तैयारी में जुटे हैं तो इसके रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी छापेमारी शुरू कर दी है।
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सुप्रीम कोर्ट व शासन ने खाद्य वस्तुओं में मिलावट को गंभीरता से लेते हुए कड़े सजा का प्रावधान किया है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत दो साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 10 हजार से 20 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। पिछले साल होली पर्व में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने 150 नमूने भरे थे। जांच में 40 के नमूने फेल मिले थे। व्यवसायियों को दोषी पाए जाने पर एडीएम कोर्ट से जुर्माना भी हुआ और सजा भी।

लेकिन इसके बावजूद व्यवसायी मुनाफाखोरी से बाज नहीं आ रहे हैं। विभिन्न पकवानों में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल, सब्जी मसाले, बेसन, मैदा, खोया व दूध की आड़ में मोटा मुनाफा कमाने की ललक आपके सेहत पर डाका डाल सकती है। त्योहार नजदीक आते ही मिलावटखोरी का धंधा जोर पकड़ने लगा है। चंद रुपयों के लालच में खाद्य पदार्थ में खतरनाक रसायन से लेकर प्रतिबंधित सामग्री मिलाने से लोगों की सेहत बिगड़ेगी।
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इस मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी रोगों के साथ त्वचा, गले में खराबी और एलर्जी पीड़ितों की संख्या बढ़ेगी। सबसे अधिक मिलावट खुले मसालों, दूध, पनीर, खोया व खाद्य तेलों में होती है।

मिलावटी दूध सेहत के लिए खतराः पर्व पर बढ़ती खपत और घटती आपूर्ति के कारण सबसे ज्यादा फायदे का सौदा मिलावटी दूध होता है। जनपद में शहरी क्षेत्रों में औसतन ढाई लाख लीटर दूध की खपत है और उत्पादन सिर्फ 80 से एक लाख लीटर है। ऐसे में धंधेबाज इसमें कार्बोनेट (खाने का सोड़ा), फार्मलीन, यूरिया और खराब मिल्क पाउडर, हैंडपंप व तालाब का गंदा पानी मिला दूध की मात्रा बढ़ाकर अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में रहते हैं।

शुद्ध दूध बीमारियों के जीवाणुओं से मुक्त होना चाहिए। भैंस के एक लीटर दूध में 6 फीसदी फैट (घी) और 9 प्रतिशत अघृत ठोस पदार्थ (प्रोटीन, बिटामिन मिनरल और कार्बोहाइड्रेट) होने चाहिए। सहकारी दुग्ध उत्पादन संघ के दुग्ध विकास अधिकारी अखिलेंद्र मिश्र के अनुसार दूध में तय मात्रा से अधिक पानी मिलाने से इसमें फैट की मात्रा प्रति लीटर तीन फीसदी कम हो जाती है। ऐसे में दूध में फायदा पहुंचाने वाले ठोस पदार्थ भी नहीं बनते।

आसानी से तैयार हो जाता है मालः अभिहीत अधिकारी चंद्रशेखर मिश्र के मुताबिक खाद्य तेल में राइसब्रान और बटल येलो के साथ आर्जीमोन और देशी घी में वनपस्पति के साथ चर्बी और ब्यूट्रिरिक एसिड, वनस्पति घी में पामोलीन ऑयल, हल्दी में लेड ऑक्साइड, लेड क्रोमेट तथा पीली मीटी, लाल मिर्च में सुडान टू, सुडान थ्री और लाल रंग, धनिया में बटर येलो और ट्रटाजिन, काली मिर्च में लाइट बेरी और पपीते के बीच, पनीर में शकरकंदी, आलू व यूरिया मिला बाजार में बेंचकर मोटी कमाई की जाती है। कमाई के फेर में मिलावटखोर आम आदमी के सेहत के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आते।

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनोज कुमार जायसवाल ने कहा कि होली पर्व पर मिलावटखोरी रोकने के लिए डीएम के निर्देश पर जिले को अलग-अलग जोन में बांटकर खाद्य सुरक्षा अधिकारी नरेश उत्तम, सर्वेश सिंह, संजय कुमार व नागेंद्र आदि की अगुवाई में चार टीमें गठित की गई हैं। 6 मार्च से होली तक सघन निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। खाद्य वस्तुओं में कहीं मिलावट व मानक के विपरीत बिक्री करते पाया गया तो व्यवसायियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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