बांदा। प्रदेश की दो सरकारों के कार्यकाल पूरे हो गए। तीसरी सरकार (भाजपा) का भी कार्यकाल पूरा होने को है, लेकिन एक दशक से यमुना नदी पर बन रहे दो पुल अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इनके अलावा पांच अन्य पुल भी कई वर्षों से अधूरे पड़े हैं। लागत लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम संशोधित एस्टीमेट भेजकर बजट मांगा है।
सेतु निगम द्वारा मौजूदा समय में जनपद में सात पुल बनाए जा रहे हैं। इनमें चार पुल नदियों पर और तीन बाईपास एवं रेलवे लाइन पर निर्माणाधीन हैं। सेतु निगम ने आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ल को दी सूचना में बताया कि यमुना नदी में औगासी घाट और मरका घाट में दोनों पुलों की मंजूरी सितंबर 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार ने दी थी। उसी समय काम भी शुरू हुआ था। बसपा सरकार की विदाई हो गई और उसके बाद सपा सरकार का भी पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा हो गया।
मौजूदा भाजपा सरकार के चार वर्ष बीत गए हैं, लेकिन यमुना नदी के दोनों पुल अब तक पूरे नहीं हो पाए। औगासी घाट पुल के लिए शासन 46 करोड़ 66 लाख 41 हजार रुपये दे चुका है। सेतु निगम 6 करोड़ 98 लाख 85 हजार रुपये और मांग रहा है। निगम के मुताबिक, 85 फीसदी काम हो चुका है। पुनरीक्षण एस्टीमेट के बाद नवंबर 2020 से काम फिर शुरू हुआ। मरका घाट पुल के लिए शासन 38 करोड़ 94 लाख 86 हजार रुपये दे चुका है। सेतु निगम ने इसका भी पुनरीक्षित एस्टीमेट बनाकर 31 करोड़ 65 लाख 16 हजार रुपये और मांगे हैं। यह पैसा न मिलने से काम बंद है।
सेतु निगम के बनाए जा रहे अन्य पुलों की स्थिति
-बागै नदी में ओरा ममसी (कमासिन) मार्ग का पुल 31 मार्च 2016 को स्वीकृत हुआ था। सेतु निगम के अनुसार, पांच फाउंडेशन पूरे हो गए हैं, तीन शेष हैं। शासन से 12 करोड़ 94 लाख 44 हजार रुपये मिल चुके हैं। दो करोड़ 31 लाख 76 हजार रुपये बाकी हैं। 68 फीसदी काम हुआ है। पुनरीक्षण के बाद सितंबर से पुन: कार्य शुरू किया गया है।
-झांसी-मानिकपुर रेल सेक्शन पर नरैनी-कालिंजर मार्ग को झांसी-मिर्जापुर मार्ग से जोड़ने वाले बाईपास पर चार लेन के पुल की मंजूरी अगस्त 2016 को हुई थी। सेतु निगम के अनुसार, यहां 18 फाउंडेशन तैयार हो गए हैं, चार शेष हैं। यहां 8 खंभे रेलवे द्वारा तैयार किए जाने हैं। शासन से अब तक 29 करोड़ 96 लाख 60 हजार रुपये मिले हैं। 26 करोड़ 81 लाख 97 हजार मिलना बाकी है। काम 52 प्रतिशत हुआ है। मौजूदा में भूमि अध्याप्ति न हो पाने पर आगे का काम बंद है।
-नरैनी रोड से महोबा रोड बाईपास रिंग रोड में केन नदी पर राजघाट के नजदीक फोरलेन का पुल सितंबर 2016 को स्वीकृत हुआ था। सेतु निगम ने यहां आठ फाउंडेशन अब तक बनाए हैं, 12 बाकी है। शासन से 39 करोड़ 56 लाख 46 हजार रुपये प्राप्त हो चुके हैं। 20 करोड़ 40 लाख 56 हजार रुपये मिलना बाकी हैं। 26 फीसदी कार्य हुआ है। सेतु निगम का कहना है कि खंभों के निर्माण में राकी स्टेटा होने से कुओं की गलाई में अधिक समय लग रहा है।
-झांसी-मानिकपुर रेल सेक्शन में नए बाईपास फोरलेन पुल की मंजूरी नवंबर 2016 में हुई थी। सेतु निगम के मुताबिक, यहां 26 फाउंडेशन तैयार हो गए हैं। आठ फाउंडशन रेलवे को बनाना है। शासन 32 करोड़ 21 लाख 16 हजार रुपये मिले हैं। 19 करोड़ 40 लाख 7 हजार रुपये मिलना बाकी है। यहां 89 फीसदी काम हो चुका है।
-बागै नदी में भदावल-भसौंधा मार्ग के बीच दीर्घ सेतु/एप्रोच रोड के लिए शासन ने मार्च 2019 को मंजूरी दी थी। सेतु निगम के मुताबिक, सात फाउंडेशन पर काम चल रहा है। एक फाउंडेशन के लिए जमीन नहीं मिल पाई है। सरकार ने 4 करोड़ 97 लाख 66 हजार रुपये दिए हैं। 12 करोड़ 54 लाख 76 हजार रुपये मिलना शेष हैं। यहां 42 फीसदी काम होना बताया गया है।