शिकोहाबाद से रिहा हुआ मजदूर परिवार बांदा में अशोक लाट में शरण लिए।
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बांदा। प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में पिछले करीब चार महीनों से ईंट भट्ठों में बंधुआ मजदूर के रूप में रखकर सताए जा रहे बांदा के 7 मजदूरों को बंधुआ मुक्ति मोर्चा के प्रयासों से बृहस्पतिवार को मुक्त करा लिया गया। ईंट-भट्ठा संचालक ने उन्हें बिना मजदूरी दिए बस पर बैठाकर रवाना कर दिया। शुक्रवार को मजदूर परिवार जिसमें बच्चे भी हैं यहा मुख्यालय पहुंचा।
इनके अलावा झांसी जनपद के भी 18 मजदूर रिहा होना बताया गया है। असंगठित मजदूर मोर्चा के उपाध्यक्ष प्रमोद आजाद ने बताया कि बिसंडा और अतर्रा तहसीलों के मजदूरों को ठेकेदार कल्लू पिछले वर्ष अक्तूबर माह में ईंट पाथने के लिए कुछ एडवांस रुपये देकर फिरोजाबाद ले गया था। वहां शिकोहाबाद तहसील के ककरारा गांव के ईंट-भट्ठा में उन्हें रखा गया। मजदूरों के मुताबिक भट्ठा मालिक उनके साथ मारपीट करता था। खर्चा और खाना भी नहीं दे रहा था। न कही जाने-आने की अनुमति थी।
16 जनवरी को बंधुआ मजदूर शिवमंगल पुत्र द्वारिका (बिसंडा) ने किसी तरह से यह सूचना बंधुआ मुक्ति मोर्चा/असंगठित मजदूर मोर्चा के दरसिंगार तक पहुंचा दी। मोर्चा पदाधिकारी ने फिरोजाबाद, बांदा और झांसी के डीएम, एसपी व मानव अधिकार आयोग से शिकायत की। इसके बाद 21 जनवरी को शिकोहाबाद प्रशासन ने मजदूरों को रिहा कराया, लेकिन पैसा नहीं दिलाया। जबरन बस में बैठाकर बांदा भेज दिया। शुक्रवार को यह मजदूर बांदा आ गए। यहां मुख्यालय में अशोक लाट में रुके। रिहा हुए मजदूरों में बिसंडा का शिवमंगल अपने पांच बच्चों के साथ तथा सतरूपा शामिल हैं।