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पॉक्सो एक्ट की सुनवाई के लिए अब हर जिले में अलग कोर्ट

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पॉक्सो एक्ट (प्रतीकात्मक) - फोटो : BANDA
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बालकों पर बढ़ते लैंगिक अपराधों से इन मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों पर कार्य का काफी दबाव है। इन अदालतों को अन्य मामलों की भी सुनवाई करनी होती है।
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ऐसे में प्रदेश सरकार ने पॉक्सो एक्ट-2012 के लिए प्रदेश में 218 नियमित अदालतों की स्थापना को अब मंजूरी देने के बाद इनके लिए 1744 पदों के सृजन को भी स्वीकृति दे दी है।
बुंदेलखंड के सभी जनपदों में भी एक-एक न्यायालय खुलेगा। बुंदेलखंड के चित्रकूटधाम मंडल में इन दिनों पॉक्सो एक्ट के 1513 केस विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।
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प्रदेश सरकार ने लैंगिक अपराधों से बालकों को संरक्षण अधिनियम-2012 (पॉक्सो एक्ट) की अलग नियमित 218 न्यायालयों के गठन का शासनादेश 13 दिसंबर 2019 को जारी किया था।
इसमें बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी व ललितपुर जनपद भी शामिल हैं। यहां एक-एक न्यायालय गठित होगा। इसके अलावा दुष्कर्म वाले पॉक्सो अपराधों में ट्रायल के लिए जिलों में दो न्यायालय अलग गठित होंगे।
इस शासनादेश के बाद अब हाल ही में 25 जनवरी को प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (न्याय) जेपी सिंह द्वितीय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महानिबंधक को भेजे सरकारी पत्र में बताया है कि प्रदेश में कुल 218 नियमित अदालतों के लिए 1744 पदों को सृजित किए जाने की स्वीकृति राज्यपाल ने दे दी है।
इन पदों में एडीजे सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। यह नियमित अदालतें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में होंगी। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि इन पदों पर जब तक निर्धारित व्यवस्था के तहत नियुक्ति नहीं होती तब तक सेवानिवृत्त अधिकारियों/कर्मचारियों को तैनात करके काम लिया जाएगा।
फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक दीक्षित का कहना है कि पाक्सो एक्ट की अलग अदालत गठित होने से इन मामलों की सुनवाई और निस्तारण शीघ्र होगा। उन्होंने बताया कि पीड़ित किशोर के बयान अदालत में रिकार्ड किए जाने के साथ एक साल के भीतर निस्तारण किए जाने का प्राविधान है।
अवयस्क पीड़िता के बयान रिकार्ड कराने में अदालत कैमरे की प्रोसीडिंग कराएगी। उसकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी। श्री दीक्षित ने कहा कि बांदा में प्रथम एफटीसी कोर्ट में पॉक्सो मामलों की फिलहाल सुनवाई चल रही है। उन्होंने इसके लिए नियमित अलग अदालत खोले जाने के निर्णय का स्वागत किया है।
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