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छोटे वाहनों पर शिकंजा, ओवरलोड पर मेहरबान

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मटौंध क्षेत्र में गुजरते ओवरलोड ट्रक और ध्वस्त सड़क। - फोटो : BANDA
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बांदा/मटौंध। यातायात माह में ट्रैफिक नियमों के पालन का दबाव सिर्फ छोटे वाहनों पर है। इन्हें पुलिस दौड़-दौड़कर पकड़ रही है। दूसरी तरफ बालू के ओवरलोड ट्रक बेरोकटोक दौड़ रहे हैं। सड़कें ध्वस्त कर रहे हैं। खनिज अधिकारी की धरपकड़ कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। ताजी बानगी रविवार की रात मटौंध क्षेत्र की है। यहां से गुजर रहे कई सौ ओवरलोड ट्रकों में खनिज अधिकारी ने मात्र 11 ट्रकों की सूची थाना पुलिस के हवाले की।
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नवंबर यातायात माह है। उधर, बालू खदानें भी चालू हो गई हैं। पुलिस दोपहिया वाहनों और छोटे चार पहिया वाहनों पर ट्रैफिक नियमों के पालन कराने का दबाव बनाने में जुटी हुई है। उनकी नाक में दम है। दूसरी तरफ जिले के कई थाना-चौकियों के सामने से शाम ढलते ही ओवरलोड ट्रकों की धमाचौकड़ी शुरू हो जाती है। यह पूरी रात चलती है।
इन्हें यातायात नियमों से शायद से कोई वास्ता नहीं है। पुलिस भी इनका रास्ता नहीं रोकती। ओवरलोड ट्रकों पर खनिज विभाग और पुलिस कितनी मेहरबान है, इसकी ताजी बानगी रविवार की रात मटौंध क्षेत्र में नजर आई। मध्य प्रदेश की खदानों से बालू लेकर आ रहे सैकड़ों ट्रक में अधिकांश ओवरलोड थे। खनिज अधिकारी राजेश कुमार ने मटौंध थाना क्षेत्र के जखौरा और चमरहा गांवों के बीच ट्रकों को रोका। मात्र 11 ट्रकों पर ओवरलोड में कार्रवाई की।
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अन्य ट्रकों को माफी मिल गई। तमाम ट्रक मध्य प्रदेश की सीमा में भाग गए। मटौंध थाना इंस्पेक्टर पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि खनिज अधिकारी ने 11 ट्रकों की सूची दी थी। उन्हीं पर कार्रवाई हुई है। कई चालक ट्रक छोड़कर भाग गए हैं। जिन ट्रकों के कागजात सही थे और ओवरलोड नहीं थे, उन्हें जाने दिया गया।
चमरहा गांव के प्रधान वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि रोजाना लगभग 400 ओवरलोड ट्रक और तकरीबन 200 ट्रैक्टर बालू ढो रहे हैं। अवैध खनन भी हो रहा है। आसपास के गांवों की सड़कें ध्वस्त हो गई हैं। उनमें गड्ढे हैं और पानी भरा है। प्रधान ने कहा कि खनिज विभाग रस्म अदायगी के लिए कार्रवाई कर रहा है।
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