बबेरू (बांदा)। मरका थाना क्षेत्र में शुक्रवार की रात घर में आग लगने से महिला और उसके तीन मासूम बच्चों की जलकर मौत के बाद गांव में जहां कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले, वहीं जिस शख्स ने इस हृदय विदारक घटना को सुना, सभी अवाक ही नहीं रह गए, बल्कि सभी के आंखों से आंसू भी निकल पड़े।
गांव में तो शोक की लहर व्याप्त हो ही गई, आसपास के गांवों के लोग भी शोकग्रस्त हो गए। कल तक गांव की गलियों में खेलने वाले मासूमों की चीत्कारें शुक्रवार की ठंडी काली रात में आग के मंजर में घर पर ही दबकर रह गईं। जब तक लोगों को पता चला तब तक कल्लू यादव का पूरा परिवार ही मौत के मुंह में समा चुका था।
मरका क्षेत्र के दुबेन पुरवा (मऊ) गांव में प्रवासी मजदूर कल्लू यादव की पत्नी संगीता देवी, तीन बच्चों आठ साल की बेटी अंजली, छह साल का बेटा आशीष और दो साल की बेटी बिट्टी उर्फ असनी की मौत के बाद शनिवार को पूरे गांव में मातम छा गया।
कल्लू यादव के घर के आसपास के कई मकानों में रहने वाले लोगों की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। साथ ही आसपास के घरों में चूल्हे तक नहीं जले। हरेक ग्रामीण की जुबान पर तीनों मासूम बच्चों की नटखट अदाएं और बातों की ही चर्चा होती रही। साथ ही संगीता की मजदूर और मेहनतकश तंगहाल जीवन की भी चर्चाएं होती रहीं।
हादसे की जानकारी के बाद बड़ी संख्या में अधिकारी और कई राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि और नुमाइंदे गांव पहुंचकर कल्लू यादव के घर लगी आग की तबाही के निशान देखते और अफसोस जताते रहे। साथ ही पीड़ित के अन्य परिजनों से मिलकर सांत्वना देते हुए शोक व्यक्त किया।
उधर, पुलिस ने पत्नी और तीन बच्चों को खोने वाले राजस्थान में मजदूरी करने गए गए कल्लू यादव को सूचना भिजवाई है। एसडीएम सौरभ शुक्ला का कहना है कि कानूनी तौर पर जो संभव होगा मदद दिलाई जाएगी। विधायक चंद्रपाल कुशवाहा, पूर्व विधायक विशंभर सिंह यादव ने भी मृतकों के घरवालों को हर संभव मदद दिलवाने का भरोसा दिलाया।
चारों शव बुरी तरह से जल चुके थे
कल्लू यादव के घर पर लगी आग पूरी तरह तभी बुझ पाई, जब उसकी पत्नी और तीन मासूम बच्चे पूरी तरह जलकर राख हो चुके थे। सुबह 9 बजे के बाद फायर ब्रिगेड कर्मियों ने मलबा हटाना शुरू किया। काफी देर बाद सबसे पहले कल्लू की पत्नी संगीता देवी का का शव मिला।
उसके करीब तीन घंटे बाद तीनों बच्चों अंजली, आशीष और बिट्टी के जले शव मिले। छह साल के बेटे आशीष का जला शव तो कच्ची दीवार की अलमारी के पास मिला। इससे ऐसा अनुमान लगाया जा रहा कि उसने आग से बचने को अलमारी में छिपने की कोशिश की।
जल्द आने को कह 10 दिन पहले गया था कल्लू
लॉकडाउन में घर लौटा कल्लू यादव 10 दिन पहले ही वापस जयपुर गया था। वहां वह मजदूरी करता है। ग्रामीणों के मुताबिक, पत्नी और बच्चों को भरोसा दिला गया था कि अगले माह मकर संक्रांति में कुछ कमाकर आएगा, लेकिन कुदरत का कारनामा ऐसा रहा कि वह यह अपना वादा पूरा नहीं कर सका। उसके आने से पहले ही पत्नी और बच्चे हादसे का शिकार हो गए।
अब घर पर कल्लू संग बूढ़ी मां ही बची
दुबेन पुरवा में एक साथ जलकर चार मौतों के बाद परिवार का मुखिया कल्लू यादव और उसकी मां भगवती ही बचे हैं। कल्लू के पिता फूलचंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। कुछ बीघा जमीन पर मामूली खेती हो जाती है। उसकी पत्नी संगीता का मायका बबेरू क्षेत्र के ही पतवन गांव में है।
कल्लू के दो भाई और हैं, पर वह बंटवारे के बाद अलग रहते हैं। शनिवार को देर रात तक वह गांव नहीं लौट पाया था। बताया कि वह रास्ते में है। उधर, चारों शवों का शनिवार को देर रात तक पोस्टमार्टम नहीं हो पाया था।