तरावीह में कुरान पूरा होने के बाद मस्जिद में नमाजियों को संबोधित करते हाफिज अकबर अली।
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बांदा। रमजान माह अब पूरे परवान पर है। तीन अशरों (10 दिन) में बंटा इस माह का पहला अशरा खत्म हो गया। बृहस्पतिवार को शाम सूरज डूबने के साथ ही दूसरे अशरे की शुरुआत हो गई। मस्जिदों में तरावीह और सामान्य अन्य पांच नमाजों में नमाजियों की भीड़ जमा हो रही है। इफ्तार पार्टियां जारी हैं। 9वें रोजे (10वीं शब) को शहर की कई मस्जिदों में तरावीह के दौरान सुनाए जाने वाला कुरान पूरा हो गया। खुशी में मिठाई बांटी गई।
रमजान में एक पायदान पूरा कर लिया। पूरे माह को 10-10 दिन के तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले 10 दिन (अशरा) को रहमत का अशरा कहा जाता है। यह 10वें रोजे को खत्म होता है। 11वें रोजे से 20वें रोजे तक दूसरा अशरा मगफिरत का है। 21वें रोजे से 29 या 30वें रोजे तक का आखिरी अशरा जहन्नुम (नरक) की आग से निजात दिलाने वाला है। पहले अशरे की विदाई पर रोजेदारों ने इफ्तार के वक्त दुआएं कीं। चारों तरफ अमनो अमान और खुशहाली के लिए दुआ की।
उधर, 10वीं तरावीह पर बुधवार की रात नवाबी जामा मस्जिद में 10वें दिन कुरान पूरा हो गया। यहां हाफिज अनस (हथौरा) ने कुरान सुनाया। समापन पर मौलाना कारी हबीब अहमद (हथौरा) ने खास दुआ कराई। मुतवल्ली शेख सादी जमां की ओर से लड्डू बंटवाए गए।
डीएवी कालेज के नजदीक स्थित मस्जिद रिसालदार साहब में भी तरावीह में कुरान पूरा हो गया। यहां बिहार के हाफिज अकबर अली ने इमामत की और कुरान सुनाया। उन्होंने कहा कि पूरे माह रोजे के साथ इबादत करनी चाहिए। गरीबों का खास ख्याल रखने पर जोर दिया। पांच वर्ष के मुदस्सिर मसूदी ने नात सुनाई। मिठाई भी बांटी गई। मस्जिद कमेटी के मोहम्मद साबिर, हबीब बाबा, मुजम्मिल, सईद, हाजी नसीर, शहंशाह, शाहरुख राईन, मोहम्मद नईम, आलम आदि शरीक रहे।
उधर, मर्दननाका स्थित हाजी सुल्तान की मस्जिद में भी कुरान पूरा हो गया। यहां भी मिठाई बांटी गई। इसी तरह ईदगाह के सामने हार्पर क्लब सचिव वासिफ जमां के आवास पर 10वें दिन तरावीह में कुरान मुकम्मल हुआ। यहां हाफिज खालिद (सिमौनी) ने कुरान सुनाया।