फोटो 09 सीकेटीपी-23- खेत में बिना दाने के पकी गेहूं की फसल। संवाद
चित्रकूट। जिले में मार्च की शुरुआत के साथ ही बढ़ते तापमान का असर गेहूं की फसल पर दिखने लगा है। तेज धूप और गर्मी के कारण खेतों में खड़ी फसल तेजी से सूख रही है, जिससे दानों के कमजोर होने और उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई हैं, क्योंकि कई स्थानों पर फसल समय से पहले पकने लगी है।
रविवार को जिले का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं सोमवार को तापमान में अचानक बढ़ोतरी हुई, अधिकतम तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 17.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। दिन में तेज धूप से खेतों में खड़ी फसल पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि मार्च की गर्मी के कारण कई स्थानों पर गेहूं की फसल समय से पहले पकने लगी है। इससे दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पा रहे हैं और उनके सिकुड़ने का खतरा बढ़ गया है। यदि इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक बढ़ी गर्मी से गेहूं के पौधों की पानी लेने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे पौधे जल्दी सूखते हैं और दाने कमजोर रह जाते हैं। बीज भंडार के विनय कुमार ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी और जरूरत पड़ने पर हल्की सिंचाई की सलाह दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र गनीवा के वैज्ञानिक मनोज शर्मा ने अगले एक-दो दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना जताई है। उन्होंने किसानों को गेहूं की हल्की सिंचाई जारी रखने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त, पोटैशियम का 0.25 फीसदी घोल बनाकर छिड़काव करने से फसल को गर्मी से होने वाले नुकसान से कुछ हद तक बचाया जा सकता है।
बीज भंडार के विनय कुमार ने भी किसानों को अपनी फसल की नियमित निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर हल्की सिंचाई करते रहने को कहा है।