गांधी प्रतिमा परिसर में एक दिवसीय उपवास पर बैठे रिटायर्ड बैंककर्मी।
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बांदा। आल इंडिया रिटायर्ड आरआरबी स्टाफ एसोसिएशन ने गांधी जयंती पर उपवास रखकर सात मांगे पूरी करने की मांग की। रविवार को नगर पालिका परिसर स्थित गांधी प्रतिमा के पास एक दिवसीय उपवास पर बैठे रिटायर्ड बैंककर्मियों ने ग्रामीण बैंकों का निजीकरण तत्काल रद्द करने और ग्रामीण बैंकों में भी राष्ट्रीय बैंकों के समान पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की। एसोसिएशन प्रांतीय उपाध्यक्ष वीके सिंह ने बताया कि मृतक आश्रित सेवा योजना, प्रवर्तक बैंकों के समान अन्य सुविधाएं व भत्ते, आईबीए से वार्ता मंच, अंश कालिक स्टाफ का नियमितीकरण और ग्रामीण बैंकों में लागू नित्रा कमेटी की संस्तुतियां तत्काल निरस्त करने की मांगे शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इन मांगों के समर्थन में जुलाई में कैंडल मार्च दिल्ली में निकाला गया था। भारत सरकार के नाबार्ड और वित्त मंत्रालय अपने आश्वासन को पूरा नहीं कर रहे। ग्रामीणबैंकों को निजी हाथों में देने की मंशा घातक है। 28 प्रांतों में 56 ग्रामीण बैंक हैं। 645 दिनों में 20647 ब्रांच हैं। 20574.83 करोड़ का रिजर्व और 3755.33 करोड़ ग्रास प्राफिट है। इसके बावजूद रिटायर्ड कर्मियों को पेंशन सुविधा नहीं दी जा रही। इस मांग को लेकर अगले चरण में 21 से 25 नवंबर तक दिल्ली में ग्रामीण बैंक कर्मी धरना देंगे। उपवास में वीके सिंह, अरुण यादव, शशि शेखर श्रीवास्तव, मधु श्रीवास्तव, आरएस परमार, सऊद अली, उमाकांत अवस्थी, संजय वाजपेई, विनोद वर्मा, दुर्गा प्रसाद अग्निहोत्री, कैलाश रैकवार, अभय श्रीवास्तव, सुरेश जैन, धीरेंद्र सिंह आदि शामिल रहे।