बांदा। फिक्स डिपॉजिट (एफडी) और रेक्रिंग डिपॉजिट (आरडी) खोलकर रकम दोगुना करने का झांसा देकर एजेंटों के जरिये 50 लाख रुपये से ज्यादा लेकर लापता हो गई लोकहित भारतीय क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी लिमिटेड से जुड़े 9 लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। इनमें कानपुर, फतेहपुर और ग्वालियर (एमपी) के आरोपी शामिल हैं।
कथित कंपनी कई वर्षों से बांदा शहर में कार्यालय खोलकर अपने नियुक्त किए एजेंटों से लोगों की एफडी और आरडी खुलवाने के नाम पर पैसा जमा करा रही थी। शहर के कई महिला-पुरुष इनके झांसे में आकर कंपनी के एजेंट बन गए। एजेंटों के जरिये ही वसूली हुई। पिछले मार्च माह से कंपनी के लोग कार्यालय में ताला डालकर लापता हो गए।
अब तक कोई सुराग न लगने पर इसी माह कंपनी में एजेंट के रूप में काम करती रहे लोगों ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करने की तहरीर दी थी। लगभग एक पखवारे तक पुलिस जांच के नाम पर लटकाए रही। अंतत: अब 15 अक्तूबर को जगदंबा प्रसाद दीक्षित (स्वराज कालोनी) की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
तहरीर में कहा गया है कि कथित सोसायटी से जुड़े लोगों ने कंपनी को पंजीकृत बताकर उन्हें एजेंट बना लिया और वसूली करवाई। आरडी-एफडी के नाम पर लगभग 50 लाख रुपये अलग-अलग खातों में जमा करवाए। तहरीर के आधार पर पुलिस ने केआर वर्मा पुत्र गौरीशंकर (पनकी, कानपुर), शहीद हाशमी (कानपुर नगर), मनोज कुमार अग्निहोत्री पुत्र रमाशंकर (श्याम नगर, कानपुर), प्रेमचंद्र तिवारी पुत्र हंसराज तिवारी (हंसपुरम, नौबस्ता, कानपुर), ऊषा देवी और उसके पति एकराम बाबू भारती (जरैली कोठी, बांदा), एसएन राठौर पुत्र जीआर राठौर (ग्वालियर) तथा सियाराम व लालेराम (पता अज्ञात) के विरुद्ध धारा 419, 420 व 406 आईपीसी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। जांच उप निरीक्षक ओमप्रकाश द्विवेदी को सौंपी गई है।