बांदा। कर्बला के शहीदों की याद में मनाए जा रहे मोहर्रम के 10 दिवसीय परंपरागत आयोजन अब अंतिम पड़ाव में है। सोमवार को 9वीं मनाई गई। करीब 1380 वर्ष पूर्व इसी रात कर्बला (ईराक) के मैदान में पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद के नवासे हुसैन सहित इसी कुनबे के 72 लोगों को शहीद किया गया था। इनमें बच्चे भी थे। उनकी याद में तमाम स्थानों पर कुरान पाठ (कुरान ख्वानी) की गई। शिया इमामबाड़ों में मजलिसों का सिलसिला चलता रहा और मरसिया, नोहा के बीच मातम हुआ।
9वीं पर सुबह कोतवाली के सामने ताजियों का मिलाप हुआ। यहां मेला में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे। दो अलग-अलग ताजिए जुलूस शहर में निकले। कई स्थानों पर लंगर हुआ। मर्दन नाका, पुलिस चौकी रोड पर भी एजाज मरहूम इमामबाड़ा और खुटला इमामबाड़ों में ताजियों का मिलाप हुआ। कई लोगों ने ठंडे पानी के पाउच बांटे।
उधर, सूरज ढलते ही शहर के करीब 67 अलाव और इमामबाड़ों में ढोल-ताशें गूंजने लगे। अलाव में कई क्विंटल लकड़ी के अंगारे तैयार होते ही जोशीले बाजे-गाजे के बीच श्रद्धालुओं ने इन्हें हाथों से उछाला। हरेक अलाव में यह प्रदर्शन देखने के लिए तमाशाइयों का हुजूम रहा। आसपास के गांवों के लोग भी आए। सबसे ज्यादा चर्चित और मशहूर अलीगंज स्थित रामा के इमामबाड़े में सर्वाधिक भीड़ रही। यहां भारी तादाद में महिलाओं ने विभिन्न पकवानों के साथ फातेहा ख्वानी की।
मान्यता के मुताबिक चांदी के नीबू रामा की ढाल में बांधे। अलाव प्रदर्शन खत्म होते ही ढाल सवारियों के जुलूस निकल पड़े। पीली कोठी चौराहा, अमर टाकीज तिराहा, मर्दन नाका पुलिस चौकी रोड, खुटला, निम्नीपार, बलखंडी नाका, पूर्वी कोठी, कालवनगंज, खानकाह दरगाह रोड, पद्माकर चौराहा, बाकरगंज, छावनी चौराहा आदि इलाकों में पंडाल सजाए गए। पूरे शहर में पुलिस गश्त जारी रही। नरैनी, बबेरू, तिंदवारी, बदौसा आदि में भी 9वीं पर ढाल, अलाव और ताजिया, अलम जुलूस निकाले गए। मंगलवार को 10वीं मोहर्रम पर सभी ढाल सवारी, ताजिए आदि प्रतीकात्मक कर्बला और केन नदी के पास दफनाए जाएंगे।