बांदा। आषाढ़ में सितम ढा रही उमस भरी गर्मी से रविवार को लोगों ने कुछ राहत महसूस की। दिनभर बादल छाए रहने और शाम को झमाझम बारिश से मौसम खुशगवार हो गया। बारिश से सड़कें और गलियां जलमग्न हो गईं। मौसम विभाग के मुताबिक, अधिकतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया।
मौसम के जानकारों का कहना है कि सोमवार को भी ऐसा ही मौसम रहने के आसार हैं। पश्चिमी हवा और दबाव से मौसम में परिवर्तन आया है। र्कई दिनों से भीषण गर्मी और तेज धूप की तपन से जूझ रहे बाशिंदों को मौसम में आए बदलाव से कुछ राहत मिल गई। सुबह लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ठंडी हवा चलने और बादल व बूंदाबांदी से गर्मी काफूर रही। मौसम सुहावना रहा। शाम को तेज बारिश होने से उमस से बेहाल लोगों को और राहत मिल गई। लगभग 10 मिमी बारिश होना बताया गया है।
मानसूनी मौसम की शुरुआत से अब तक लगभग 47 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। झमाझम बारिश से शहर के कई इलाकों में जलभराव की नौबत रही। सड़कें और गलियां जलमग्न हो गईं। नाले-नालियों का गंदा पानी सड़कों पर आ गया। मौसम विभाग के मुताबिक, बादल और बारिश से अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस से लुढ़ककर 35 डिग्री सेल्सियस हो गया। न्यूनतम तापमान में भी दो डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। 29 से 27 डिग्री सेल्सियस हो गया। जानकारों का कहना है कि पश्चिमी हवाएं से चलने से सोमवार को भी बादल और बारिश की संभावना है।
18 साल बाद मात्र ढाई फीट पर चल रही नहर
बांदा। लगभग 18 साल बाद केन केनाल नहर पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही है। इसकी मुख्य वजह बांधों में पानी का कम स्टोर होना बताया गया है। जुलाई माह में केन कैनाल में लगभग आठ फीट पानी छोड़ा जाता था, लेकिन मौजूदा समय सिर्फ 2.5 फीट पर नहर चलाई जा रही है। अतर्रा और बांदा ब्रांच नहरों में भी पूरी क्षमता से नहर नहीं चल पा रहीं। एसडीओ (सिंचाई विभाग) कमल कुमार ने बताया कि बांध क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश न होने से पानी का स्टोर बेहद कम है। इसी वजह से नहर पूरी क्षमता से नहीं चलाई जा रही। बताया कि वर्ष 2003 के बाद के बाद अब ऐसी स्थिति आई है। पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो बमुश्किल 10 दिन से ज्यादा नहर नहीं चल सकेगी।
बारिश से फसलों को मिली संजीवनी
बांदा। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम व कृषि वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि बारिश से बोई गई खरीफ की फसल को नई जान मिल गई है। जिन किसानों ने अभी तक खेतों में नमी न होने से बुआई नहीं की है, वह अब बुआई कर सकेंगे। अगले दो दिनों तक बारिश के आसार हैं। किसानों को इस नमी का भरपूर लाभ उठाना चाहिए। तेज धूप से सूख धान बेड़ भी बच जाएंगी।