खप्टिहाकलां (बांदा)। दो माह तक दबंग भट्ठा मालिक
द्वारा बंधक बनाए गए दलित मजदूर रिहाई के बाद शुक्रवार को तड़के अपने घर आ
गए। यहां आकर मजदूर बेहद खुश हैं।
इन्होंने रिहाई का श्रेय ‘अमर
उजाला’ की खबरों को दिया। मजदूर महेश वर्मा ने बताया कि यहां से लगभग दो
दर्जन परिवार के लोग ठेकेदार के माध्यम से मजदूरी की तलाश मेें पहले कनौता
(जयपुर) गए।
वहां से ठेकेदार जहांगीर के जरिये मैनपुरी जनपद के
करहल थानांतर्गत मीठेपुर गांव पहुंचे। वहां ईंट भट्ठा मालिक ध्रुव यादव के
यहां मजदूरी के लिए लगा दिया गया। भट्ठा मालिक ने सिर्फ 9 दिन काम कराने के
बाद बंधक बना लिया और कहा कि सात लाख रुपये भरे बिना यहां से जाने नहीं
देंगे। मजदूर दो महीने बगैर काम के बंधक बने रहे। भट्ठा
मालिक का
कहर उन पर टूटता रहा। मजदूर मेड़वा ने बताया कि भट्ठा मालिक ने अपने दो
लोगों को उनकी निगरानी मेें लगा दिया था, जो दारू पीकर निगरानी करते थे।
रात
में बंदूक से फायर करके डराते थे। शौच को गईं महिलाओं के पीछे गुंडे लगा
दिए जाते थे जो खेतों में छिपकर महिलाओं को ताकते थे। मीरा ने बताया कि
भट्ठा मालिक और उसके पुत्र दारू पीकर गाली-गलौज करते थे।
कहते थे
कि कानून हमारी जेब में है। अरहर के खेत में बंदूकें लेकर बैठकर छिपकर
ताकते थे। कल्ली ने बताया कि वापस जाने देने की फरियाद पर जान से मारने की
धमकी दी जाती थी। हम सभी मजदूरों का पैसा बकाया है। बहोरी ने बताया कि
ठेकेदार के आदमी रात को उनकी झुग्गी झोपड़ियों के इर्द-गिर्द कड़ा पहरा
रखते थे।
बीच-बीच में बंदूकों से फायर कर दहशत पैदा करते थे। रिहा
मजदूराें ने ‘अमर उजाला’ को दिल से धन्यवाद दिया कि उसकी ताबड़तोड़ खबरों
से ही रिहाई मिली। क्षेत्रीय थाना प्रभारी, लेबर इंस्पेक्टर और एसडीएम आदि
ने भट्ठे में पहुंचकर उन्हें मुक्ति दिलाई। बसपा नेताओं का भी आभार जताया।