रेलवे बोर्ड ने तीन दशक बाद झांसी डिवीजन के कार्यक्षेत्र में फिर बदलाव किया है। इसका क्षेत्रफल 90 किलोमीटर कम कर दिया गया है। ताकि उसकी देखभाल व निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके। अब ओहन स्टेशन से धवलपुर तक के मेंटीनेंस का जिम्मा झांसी डिवीजन में रहेगा। यह व्यवस्था पहली फरवरी से शुरू हो जाएगी।
झांसी डिवीजन का कार्य क्षेत्र चार दशक पहले इलाहाबाद मंडल के नैनी जंक्शन था। करीब 400 किलोमीटर लंबी लाइन की निगरानी में दिक्कतें आ रही थीं। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने झांसी मंडल का कार्यक्षेत्र घटाकर इरादतगंज रेलवे स्टेशन तक कर दिया था। 315 किलोमीटर रेलवे लाइन की निगरानी में आ रही दिक्कतों की वजह से करीब 30 साल बाद फिर इसमें बदलाव किया गया है। अब झांसी मंडल का दायरा घटने के बाद यह ओहन स्टेशन तक 225 किलोमीटर कर दिया गया है।
मानिकपुर जंक्शन तक रेलवे ट्रैक की देखरेख अब इलाहाबाद मंडल करेगा। उत्तर मध्य रेलवे के झांसी डिजीवन का कार्यक्षेत्र सवा तीन सौ किलोमीटर में फैला है। इलाहाबाद के नजदीक के इरादतगंज रेलवे स्टेशन से लेकर झांसी के धवलपुर स्टेशन तक इतना लंबा दायरा अभी तक झांसी डिवीजन के जिम्मे था। ऐसे में देखरेख और निगरानी में दिक्कतें होती थीं। यदि अधिकारी कार्यक्षेत्र का निरीक्षण करना चाहें तो एक दिन में नहीं पूरा होगा।
झांसी मंडल डिवीजन में कार्यक्षेत्र कम करने की काफी दिनों से कोशिशें चल रही थीं। रेलवे बोर्ड ने इसके मद्देनजर रेलवे ट्रैक का दायरा कम करने का निर्णय लिया है। अब इरादतगंज से ओहन स्टेशन तक करीब 90 किलोमीटर रेलवे लाइन इलाहाबाद डिवीजन में शामिल हो गई है। रेलवे बोर्ड ने स्टेशन अधीक्षक को भेजे पत्र में कहा है कि कार्यक्षेत्र कम हो जाने से झांसी मंडल के अधिकारी रेलवे ट्रैक की विधिवत निगरानी कर सकेंगे।
स्टेशन अधीक्षक बांदा बीपी वर्मा ने कहा कि ‘रेलवे ट्रैक सबसे संवेदनशील होता है। जरा सी चूक बड़े हादसे का वजह बन जाती है। इसलिए कार्यक्षेत्र का दायरा कम होना फायदेमंद होगा। रेलवे बोर्ड से अभी हाल में इस बाबत पत्र आया है। कार्यक्षेत्र में बदलाव के साथ उसी हिसाब से व्यवस्था की जा रही है।