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संविदा लाइनमैन व युवती करंट से झुलसे

Sat, 04 Feb 2017 12:53 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
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बस - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो
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यात्रियों को डीलक्स और ए श्रेणी की लग्जरी बसों में सफर करना फरवरी माह और मार्च के पहले पखवारे में नसीब नहीं होगा। ये बसें ईवीएम को बूथों तक पहुंचाने के लिए लगाई जा रही हैं। दैनिक व अन्य यात्रियों को इस दौरान खटारा बसों से गंतव्य तक पहुंचना होगा। प्रमुख रूटों पर यात्रियों का दबाव कम करने के लिए इन बसों के फेरे भी बढ़ाए जाएंगे।
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ईवीएम मशीनों में तकनीकी खराबी आने से चुनाव प्रभावित न हो, इसके लिए ईवीएम को स्प्रिंगदार आरामदायक सीटें वाली बसें मुहैया कराई जाएंगी। लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद, कानपुर, फतेहपुर के बीच चलने वाले चालक-परिचालकों के आगे लक्ष्य हासिल करने का सिरदर्द भी नहीं रहेगा। बांदा डिपो प्रशासन ने दैनिक दूरी लक्ष्य को चुनाव समाप्त होने तक खत्म करने का निर्णय लिया है।

रोडवेज प्रशासन ने लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, दिल्ली समेत ग्रामीण क्षेत्रों की सेवाओं से बसों को समेटने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन की तरफ से चुनाव के लिए बस मांगे जाने के चलते यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। खासकर लखनऊ और कानपुर रूट की सबसे ज्यादा बसें हटेंगी। ग्रामीण क्षेत्र की सेवाएं भी चुनाव तक स्थगित रहने की संभावना है। डीलक्स व स्पेशल बसों समेत लोहिया सेवाओं को ईवीएम लाने व ले जाने के लिए लगाया जाएगा।
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बसों का प्रभार संभागीय परिवहन महकमे को सौंपा गया है। वे ही पीठासीन अधिकारियों व कर्मचारियों की बसों की सुपुर्दगी करेंगे। ईवीएम अटैचीनुमा प्लास्टिक के बक्से में पैक किया जाता है। जिससे इसके खराब होने की संभावना कम की जा सके। धूलमुक्त व तापमान नियंत्रित रखने के लिए इसे संभालकर बूथ तक ले जाने के आयोग की तरफ से निर्देश दिए गए हैं। इसका तापमान अधिकतम 55-60 फारेनहाइट के बीच रखने के निर्देश दिए गए हैं।

एसडीएम सदर प्रह्लाद सिंह के मुताबिक बसों की सीटों व अन्य वाहनों पर इसे संभालकर स्थानांतरित करने के प्रशिक्षण दिए गए हैं। केके शर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, उप्र परिवहन निगम, चित्रकूटधाम मंडल ने कहा कि चित्रकूटधाम मंडल में प्रशासन की तरफ से  25 बसें मांगी गई हैं। बांदा में सबसे ज्यादा 16 बसें भेजी जा चुकी हैं। अभी और बसें अधिग्रहीत किए जाने के आसार हैं। फरवरी माह के पहले सप्ताह से चालक-परिचालकों का दैनिक दूरी का लक्ष्य खत्म कर दिया जाएगा। यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दबाव वाले रूट पर बची हुई बसों के फेरे बढ़ाए जाएंगे।
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